निसिंग। प्रजापिता ब्रह्माकुमारीज ईश्वरीय विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित कार्यक्रम में बीके छोटेलाल ने कहा कि अपनी स्वयं की स्थिति श्रेष्ठ है तो परिस्थितियों बदल जाती हैं। महान आत्मा के संकल्प हमेशा पूर्ण होते हैं। उन्होंने कहा कि अपनी स्थिति को योग युक्त बनाकर चलना जरूरी है। परिवर्तन ही प्रगति का साधन है। भगवान को अपना साथी बनाते हैं तो वह छत्रछाया बन जाता है और हमें कैसी भी स्थिति कैसे भी हालत से निकाल लेते हैं। इसके लिए बार-बार यही चिंतन और अभ्यास करते रहें अपनी स्मृति में लाएं कि मैं एक चेतन शक्ति आत्मा हूं। इस देह से न्यारी हूं, फरिश्ता हूं, हमेशा उड़ता रहता हूं ,इसी प्रकार से अनेक स्वमानों का अभ्यास करने से फरिश्ता स्थिति का हम अनुभव करते हैं। संवाद