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Karnal News: रक्षाबंधन पर बाजार को तीन करोड़ के कारोबार की आस

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देव शर्मा
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करनाल। रक्षाबंधन पर्व से इस बार कर्णनगरी के बाजारों को काफी उम्मीदें हैं। इस बार सिर्फ राखियों से तीन करोड़ रुपये के कारोबार की आस है। जिससे थोक और फुटकर विक्रेताओं में उत्साह देखा जा रहा है। अब तक विदेशों या दूर दराज रह रहे भाइयों को भेजने के लिए राखी की खरीदारी हो रही थी, लेकिन सोमवार से शुरू हुए सप्ताह में स्थानीय भाइयों के लिए भी बहनों ने राखियां खरीदनी शुरू कर दी है।
इस बार रक्षाबंधन त्योहार को देखते हुए कई ब्रांडेड कंपनियों ने विशेष रक्षा थाली को बाजार में उतारा है। साथ ही महिलाओं के लिए विशेष राखी कंगन और बच्चों के लिए इलेक्ट्रानिक राखियों की एक शृंखला पेश की है। अक्सर रक्षाबंधन स्वतंत्रता दिवस के ही आसपास होता था, बाजारों में तैयारियां भी उसी स्तर पर होती थी, लेकिन इस बार सावन दो होने के कारण रक्षाबंधन का त्योहार भी करीब 15 दिन देरी से है। हालांकि राखियां तो कई दुकानों पर बिकनी शुरू हो गई थीं।
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राखियों के थोक विक्रेता राजेश गुप्ता ने बताया कि करनाल शहर में आठ राखियों के थोक विक्रेता हैं। राखियां खासतौर पर कोलकाता और गुजरात के राजकोट से खरीदकर लाई जाती हैं। हालांकि करीब 20 प्रतिशत राशियां थोक विक्रेता भी अपने गोदामों में भी बनवाते हैं, लेकिन इनका कच्चा माल बाहर से ही आता है। दिल्ली में भी राखियों का बड़ा कारोबार होता है, कुछ थोक विक्रेता दिल्ली से भी राखियां लाते हैं। जैसे ही राखी का पर्व नजदीक आता है तो उसके 10 दिन पहले बड़ी संख्या में राखियों की दुकानें खुल जाती हैं। इस बार भी ऐसा ही हुआ है। शहर में सैकड़ों दुकानदार ऐसे हैं, जिन्होंने राखियों के प्रति उत्साह को देखते हुए कुछ दिनों से अपना कारोबार बदलकर राखियां बेचना शुरू कर दिया है, कुछ ने अपने पुराने कार्य के साथ राखियों के काउंटर लगा दिए हैं। आलम ये हो गया है कि शहर से लेकर गांव तक गली गली में राखियां बिकने लगी हैं। ये दुकानें हजारों में पहुंच गई हैं, जिनकी संख्या रक्षाबंधन के तीन दिन पहले और अधिक बढ़ सकती है।
बुरी नजर से बचाएगी राखी
भाई को बुरी नजर से बचाने के लिए खासतौर पर बच्चों के लिए ''ईवलआई'' और इसके साथ एडी यानी अमेरिकन डॉयमंड वाली राखियां भी बाजार में हैं। ऐसी मान्यता है कि ये राखी भाई को बांधने से उसे किसी की बुरी नजर नहीं लगती है। इसलिए ये राखियां भी खूब बिक रही हैं। ये राखी 60 रुपये से 150 रुपये की रेंज में बाजार में उपलब्ध हैं।
भा रहीं सोने-चांदी की राखियां
साधन संपन्न घरानों की बहनें अपने भाइयों के लिए महंगी राखियां भी खूब खरीद रही हैं। सराफ अंसुल बंसल ने बताया कि सोने और चांदी की बनी राखियां भी सराफा बाजार में लगभग सभी दुकानों पर उपलब्ध हैं। चांदी की राखियों की खूब मांग भी है। सोने की राखियां विशेष आर्डर पर बनाई जा रही हैं। चांदी की राखी की रेंज एक हजार रुपये से शुरू होती हैं।
बच्चों को खूब भा रही इलेक्ट्रानिक राखियां
कई ब्रांडेड कंपनियों ने बाजारों का रुख पहचानते हुए बच्चों के लिए इलेक्ट्रानिक राखियों की एक बड़ी शृंखला बाजार में उतारी है। इसमें इलेक्ट्रानिक घड़ी, चश्मे, छोटी गाड़ी, वाटरगेम आदि की राखियां शामिल हैं। जो बच्चों की पहली पसंद बन रही हैं। इनकी बिक्री भी खूब हो रही है।
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जिलेभर में इस बार सिर्फ राखियों का कारोबार तीन करोड़ रुपये तक पहुंचने की संभावना है। यही कारण है कि करनाल सहित जिले के विभिन्न शहरों में राखी विक्रेता उत्साहित हैं।रक्षाबंधन के लिए कई ब्रांडेड कंपनियों ने राखियों के साथ-साथ पहली बार रक्षा तिलक थाली भी बाजार में उतारी है, जिसमें देव प्रतिमा के साथ-साथ तिलक, रोली, पुष्प आदि की सारी व्यवस्था है। ये थाली 80 रुपये से 250 रुपये की रेंज में है। महिलाओं के लिए इस बार विशेष कंगन वाली राखी बाजार में आई है, क्योंकि अब तक बहनें विवाहित भाई को राखी बांधते समय भाभी को भी लुंबा बांधती थी लेकिन अब लुंबा का रिवाज घटता जा रहा है, इसके स्थान पर राखी कंगन महिलाओं की पहली पसंद बन रहे हैं। - राजेश गुप्ता, थोक राखी विक्रेता, सुभाष मार्केट करनाल
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