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Karnal News: घुड़सवारों न दिखाए करतब, हैरत में पड़े दर्शक

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- खालसाई खेलों व हैरतअंगेज करतबों से सेक्टर-12 के मैदान में दिखा आनंदपुर साहिब, श्री हजूर साहिब के होले मोहल्ले और दमदमा साहिब की बैसाखी जैसा नजारा
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माई सिटी रिपोर्टर

करनाल। तख्त श्री केशगढ़ साहिब आनंदपुर साहिब, श्री हजूर साहिब के होले मोहल्ले और श्री दमदमा साहिब की बैसाखी जैसा नजारा बुधवार को कर्ण नगरी स्थित सेक्टर-12 के मैदान में देखने को मिला। जहां छह-छह घोड़ों पर तीन-तीन निहंग सिंहों ने सवारी करते हुए दौड़ लगाई। घुड़सवारों के करतब देख सभी हैरत में पड़ गए।

दिल्ली से करनाल पहुंची खालसा फतेह मार्च के स्वागत में इन खालसाई खेलों व जंगी करतबों का आयोजन किया गया। कौमी जरनैली बाबा जस्सा सिंह रामगढ़िया की 300 साला जन्म शताब्दी के उपलक्ष्य में खालसा फतेह मार्च निकाला जा रहा है। साढ़े चार बजे बजे सेक्टर-12 के मैदान में पंजाब की जत्थेबंदिया व खालसा फौज घोड़े और ऊंटों पर सवार होकर पहुंचाना शुरू हो गई थी। पांच बजे पालकी साहिब में सुशोभित दरबार साहिब का मैदान में प्रकाश होने के बाद खालसाई खेलों की शुरुआत हुई।
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गुरु के जयकारों से शुरू हुए खेलों में सबसे पहले एक-एक घोड़े पर सवार निहंग सिंहों ने दौड़ लगाई। इस दौरान भाले से मैदान में रखे निशाने को भी पलक झपकते ही उठाया। करीब 20 एकल घोड़ों की दौड़ के बाद जोड़ों में घोड़ों की दौड़ हुई। दो-दो घोड़ों पर एक निहंग सिंह सवार था। इसके बाद चार-चार और छह-छह घोड़ों की दौड़ जब हुई तो मैदान तालियों और बोले सो निहाल के जयकारों से गूंज उठा। मैदान में उपस्थित संगतों ने गुरु के जयकारों के साथ निहंग सिंहों और युवा घुड़सवारों का उत्साह बढ़ाया। इससे पहले ढाडी जत्थे ने गुरु महिमा का बखान किया। ब्यूरो
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पंजाब से आए जत्थे, विशेष रूप से प्रशिक्षित हैं घोड़े

खालसा फतेह मार्च में विशेष रूप से पंजाब से जत्थेबंदियां पहुंचीं। इंटरनेशनल सिख फोरम के महासचिव प्रीतपाल सिंह पन्नु ने बताया कि अलग-अलग जत्थेबंदियों के जंगी घोड़े खालसाई खेलों आदि के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित हैं। फतेह मार्च में शिरोमणि पंथ अकाली बुड्ढा दल (पांचवां तख्त) के प्रमुख बाबा बलबीर सिंह (96 करोड़ी) अपने दलबल के साथ व घुड़सवार खालसा फौज के साथ शामिल हुए। उनकी अगुवाई में ही सभी जत्थेदारों ने प्रदर्शन किया। इसके अलावा बाबा मान सिंह मढ़ियांवाले, बाबा वरीयाम सिंह मढ़ियांवाले, बाबा मेजर सिंह सोढ़ी मुखी दशमेश तरनादल, जत्थेदार रणजोध सिंह व जत्थेदार जस्सा सिंह बुड्ढा दल, बाबा खड़क सिंह लुधियाना भी दल पंथ और घुड़सवार निहंग फौज के साथ शामिल हुए।
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