श्रीकृष्ण कृपा प्रेरणा उत्सव एवं श्री राधा जागरण में नंद किशोर नंदू भैया की स्वरलहरियों पर नाचे लोग
लोक सभा अध्यक्ष ओम बिड़ला, मुख्यमंत्री मनोहर लाल, साध्वी ऋतंभरा, शंकराचार्य स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ, पीयूष मुनि सहित कई संत पहुंचे
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। महामंडलेश्वर गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज के जन्मदिन पर मंगलवार की रात उस समय यादगार बन गई, जब कई संतों के प्रवचनों के बीच प्रसिद्ध भजन गायक नंदकिशोर शर्मा नंदू की स्वरलहरियों पर पूरा पंडाल थिरक उठे। मंच पर बैठे संत ही नहीं बल्कि लोक सभा अध्यक्ष ओम बिड़ला, मुख्यमंत्री मनोहर लाल के हाथों की उंगलियां भी साजोआवाज के साथ थिरकने लगी। नंदू ने गाया-पीले पीले रे गीता रस का प्याला छलके, गुरु दरबार में देखो अमृत बरसे। इसी बीच गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि काम पर ध्यान दो, नाम की चिंता मत करो, काम करोगे तो नाम खुद ब खुद हो जाएगा।
सेक्टर 12 के एचएसवीपी ग्राउंड में रविवार की रात को आयोजित श्री कृष्ण कृपा प्रेरणा उत्सव एवं श्री राधा जागरण की शुरुआत स्वामी काशनी जी महाराज, गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज, भानूपुरा पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ, दीदी मां साध्वी ऋतंभरा, भूपेंद्र सिंह महाराज, पीयूष मुनि महाराज, कर्णपुरी महाराज, भद्रकाली पीठ के सतपाल महाराज, वंशी पुरी महाराज, गुरु शरणानंद महाराज, स्वामी अरुण दास, स्वामी कृष्णा नंद के साथ लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला, मुख्यमंत्री मनोहर लाल, सांसद संजय भाटिया, विधायक असीम गोयल, हरविंद्र कल्याण, भजन गायक नंदकिशोर नंदू ने दीप प्रज्वलित किया। सबसे पहले वंशी पुरी महाराज ने कहा कि 15 मई 1957 को देश को ऐसा दैदीप्यमान सितारा मिला, जिसने पूरी दुनिया को गीता के सार से परिचित कराया।
संतों व राजनीतिज्ञों के संबोधन के बीच बीच में नंदकिशोर नंदू भैया के भजनों से पूरा पंडाल थिरकता रहा। श्रद्धालुओं के लिए भोजन की भी व्यवस्था की गई है। स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि देशभर में आज रक्तदान शिविर चल रहे हैंं। जल बचत व नशा मुक्ति के साथ साथ ये भी संकल्प लेने को कहा कि शीघ्र ही एक दिन एक मिनट के लिए भारत को गीतामय बनाया जाएगा। जिसमें सभी अंबेसी को पत्र लिखा जाएगा, संसद, मदिरों, मठों से लेकर घरों तक हर कोई एक मिनट के लिए ठहर कर गीता को याद करेगा।
महापुरुष के जन्म से कुल भी धन्य हो जाता है : स्वामी काशनी महाराज
संत काशनी जी महाराज ने मुख्य वक्ता के रूप में कहा कि ईश्वरीय अंत:करण में लवलीन महापुरुष जिस कुल में जन्म लेते हैं, वह कुल कृतार्थ हो जाता है, मां भी खुद को धन्य मानती है। जहां ऐसे महापुरुष जाते हैं, वह स्थान तीर्थ बन जाता है। गीता मनीषी ने पूरी दुनिया को गीता का सार बताकर कल्याण का रास्ता दिखाया है।
समस्या नहीं बल्कि समाधान बड़ा होता है : साध्वी ऋतंभरा
साध्वी ऋतंभरा ने कहा कि मां चाहे तो दैत्य के घर में भक्त और ऋषि के घर में रावण पैदा कर सकती है। कोई समस्या बड़ी नहीं होती, समाधान बड़ा होता है। क्रोध से नहीं प्यार से समाधान हो सकता है। राम मंदिर बन रहा है, काशी कॉरीडोर देख रहीं हूं, सीएम ने भी तीर्थो का जीर्णोद्धार कराकर बड़ा काम किया है। आज देश का नेतृत्व उनके हाथ में है जो प्रमाणिक है।
देश को अपनी अध्यात्म परंपरा पर गर्व है : पीयूष मुनि
जैन मुनि पीयूष जी महाराज ने कहा कि भारतीय संस्कृति में संत को गरिमामयी स्थान मिला है। हर देश अपनी उपलब्धियों पर गर्व कर सकता है लेकिन हम भारतीय हैं, हमें अध्यात्म परंपरा के संवाहक संतों की परंपरा पर गर्व है। गीता कर्तव्य बोध तो कराती ही है, हमारा मार्गदर्शन भी करती है। जिसके बाद भटकाव की संभावना खत्म हो जाती है।
प्रेम को समझना बेहद आवश्यक : संत भूपेंद्र
संत भूपेंद्र सिंह महाराज ने राधा नाम का मर्म समझाते हुए कहा कि हमारे शरीर से जो तरंगें बाहर की ओर निकल रही है, वह यदि अंदर की ओर हो जाएं तो राधा तत्व बन जाएगा। ये तत्व जब शरीर की परिक्रमा शुरू कर देगा तो महारास बन जाएगा। जिसका अर्थ है प्रेम। जिसे समझना बेहद आवश्यक है।