माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। नगर निगम 1.31 करोड़ रुपये की लागत से पार्कों की मरम्मत कराएगा। निगमायुक्त ने शुक्रवार को अभियंताओं के साथ बैठक में बताया कि नगर निगम क्षेत्र में कुल 192 पार्कों में 11 पार्कों की मरम्मत नगर निगम खुद कर रहा है। 24 की देखरेख रेजिडेंट वेल्फेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) की ओर से की जा रही है। 157 पार्कों की मरम्मत के लिए टेंडर लगाया गया था, जो खुल गया है। जल्द ही संबंधित एजेंसी को वर्क ऑर्डर जारी कर दिया जाएगा।
निगमायुक्त ने बताया कि जो टेंडर खुला है, उसमें संबंधित एजेंसी को ही पार्कों की उचित साफ-सफाई, नलाई, गुढाई, कटाई, छंटाई, घास कटिंग तथा बागवानी अपशिष्ट का उठान का कार्य भी दिया गया है। इन कार्यों पर नगर निगम अनुमानित एक करोड़ 31 लाख रुपये की राशि खर्च करेगा। उन्होंने कर्ण कैनाल पर मौजूद 11 पार्कों की देख-रेख भी अच्छे से करने के निर्देश दिए। पार्को की देखरेख के लिए कनिष्ठ अभियंताओं की जिम्मेदारी तय की गई। पार्को की साफ-सफाई व बागवानी अपशिष्ट का समय पर उठान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में निगमायुक्त ने पार्को में सिविल कार्य, झूलों व ओपन एयर जिम की मरम्मत जैसे बुनियादी कार्य करवाने को कहा। उन्होंने कहा कि अभियंता सभी पार्कों का दौरा करें और देखें कि उनमें क्या-क्या कार्य करवाए जाने हैं, उनकी सूची तैयार कर कार्य कराएं। कनिष्ठ अभियंताओं को एक माह का समय देते हुए कहा कि सभी पार्कों की साफ-सफाई, ठोस व बागवानी अपशिष्ट तथा सी एंड डी वेस्ट का उठान करवाया जाए, कहीं पर भी ऐसा कचरा दिखाई नहीं देना चाहिए।
उन्होंने संबंधित कार्यकारी अभियंताओं को निर्देश दिए कि वह एजेंसी से कार्य योजना सब्मिट करवाएं, कि वह किस पार्क में कितनी लेबर लगाएगा। इसके अतिरिक्त सुपरवाईजर व लेबर के नाम तथा संपर्क नंबर की सूची भी ली जाए। सभी पार्कों की उचित निगरानी की जाए, अगर कहीं पर खामी मिले तो एजेंसी को तुरंत नोटिस जारी करें। यदि फिर भी कार्य संतोषजनक नहीं पाया जाता, तो उसे ब्लैक लिस्ट कर दिया जाए। इस वर्ष नगर निगम ने आठ हजार नए पौधे लगाने का लक्ष्य रखा था, जिसमें से दो हजार लग चुके हैं, शेष पौधे जल्द से जल्द लगाए जाएं।
देखरेख के लिए आरडब्ल्यूए करें आवेदन
निगमायुक्त ने शहर की रेजिडेंट वेल्फेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) से अपील करते कहा कि वह अपने क्षेत्र में मौजूद पार्कों की देख-रेख के लिए उन्हें नगर निगम से ले सकती हैं। इसके लिए वह नगर निगम कार्यालय में प्रार्थना पत्र दे सकते हैं। इसके लिए उन्हें सरकार की ओर से निर्धारित चार रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से भुगतान भी किया जाएगा।