जिले में भ्रूण लिंग जांच से जुड़ा मामला करीब चार साल बाद उजागर हुआ है। इससे पहले वर्ष 2022 में ऐसा केस सामने आया था। उप सिविल सर्जन डॉ. शीनु चौधरी के अनुसार, वर्ष 2026 में यह पहला मामला है। विभाग लगातार निगरानी और जागरूकता अभियान चला रहा है जिसके चलते इस तरह की गतिविधियों पर काफी हद तक रोक लगी थी। जिले का लिंगानुपात 15 वर्षों में पहली बार 984 तक पहुंच गया है।