करनाल। श्री खाटू श्याम मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा कथावाचक आचार्य लाल मणी ने कहा कि द्रौपदी ने अपने पांच पुत्रों के हत्यारे अश्वथामा को क्षमा कर दिया, जबकि माता उत्तरा ने अपने गर्भ की रक्षा के लिए श्रीकृष्ण के चरणों में प्रार्थना की थी। माता कुंती ने भगवान से केवल तीन वर मांगे दुख, भक्ति और अहंकार का नाश, ताकि उनकी बुद्धि सदैव प्रभु चरणों में लगी रहे। आचार्य ने कहा कि कल्याण की इच्छा रखने वाले व्यक्ति के लिए प्रभु का श्रवण, कीर्तन और सुमिरण जीवन के तीन अनिवार्य स्तंभ हैं। मंदिर में हरे कृष्ण और श्याम नाम के जयकारों से वातावरण गुंजायमान हो उठा। भागवत कथा में बताया गया कि श्रीमद्भागवत का श्रवण जन्म-जन्मांतर के पापों का नाश करता है और जीव को मोक्ष की राह दिखाता है। संवाद