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Karnal News: शौकिया तौर पर शुरुआत कर नशे के आदी हो रहे किशोर

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- मनोरोग ओपीडी में 100 में से 70 केसों में किशोरावस्था में शुरू किया गया था धूम्रपान
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अनुज शर्मा
करनाल। एक बार शौकिया तौर पर नशा करने के बाद किशोर इसके आदी हो रहे हैं। नागरिक अस्पताल के मनोरोग विशेषज्ञ की ओपीडी में आ रहे केसों पर नजर डालें तो 100 में से 70 किशोरों ने पहली बार शौकिया तौर पर धूम्रपान किया था। जो अब उनकी आदत में बन गई है। पांच माह में ओपीडी में धूम्रपान करने वाले 529 केस पहुंचे हैं।
क्लीनिक साइकोलॉजिस्ट संतोष ने बताया कि ओपीडी में पहुंच रहे केसों की काउंसलिंग में सामने आया है कि उन्होंने पहली बार 12 से 14 साल तक की उम्र में अपने सहपाठियों के साथ धूम्रपान किया था। धूम्रपान करने वाले किशोरों व युवाओं की संख्या बढ़ती जा रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस बार धूम्रपान निषेध दिवस की थीम बच्चों पर आधारित यानी बच्चों को तंबाकू उत्पाद से बचाना रखी है। अभिभावक बच्चों को डांटने के बजाय उन्हें दोस्त की तरह उनकी बात सुनें और समझें। उन्होंने बताया कि काउंसलिंग के बाद कुछ बच्चों ने धूम्रपान करना छोड़ दिया है। - संवाद
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नशे के लिए डाला गया दबाव
मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. मनन गुप्ता ने बताया कि पीर प्रेशर का मतलब है कि अपने ही ग्रुप के सदस्यों द्वारा बनाया गया दबाव। यह दबाव तब होता है जब एक ही समूह के सदस्य अन्य सदस्यों को ऐसे काम करने के लिए प्रभावित करते हैं, जबकि वह ऐसा नहीं करना चाहते। सह कर्मियों के दबाव (पीर प्रेशर) के अलावा युवाओं में नशे की आदत के कई कारण हो सकते हैं। इनमें आनुवांशिक प्रवृत्ति, मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं, पारिवारिक वातावरण, शिक्षा की कमी, सामाजिक-आर्थिक कारण, दुखद घटनाएं व बचपन के दुखद अनुभव शामिल हो सकते हैं।
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लक्षण
मनोरोग सामाजिक कार्यकर्ता विकास ने बताया कि माता-पिता के साथ कभी अच्छा तो कभी बुरा व्यवहार करना। नए-नए दोस्त बनाना। स्कूल न जाना। नींद से जुड़ी समस्या होना। खाने से जुड़ी समस्या होना। तनाव महसूस करना। शरीर की बनावट। कपड़ों आदि पर ज्यादा चिंता करना। बच्चों का आक्रामक व्यवहार करना इसके लक्षण हैं।
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