नीलोखेड़ी/करनाल। प्रौद्योगिकी के लगातार उपयोग और नेतृत्व की इच्छाशक्ति के कारण सरकारी कामकाज और आर्थिक लेन-देन में पारदर्शिता आई है। ये बात हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान के निदेशक डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने कही। वे मंगलवार को संस्थान में चल रहे चार दिवसीय महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के अंतर्गत खंड संसाधन व्यक्ति के लिए सामाजिक अंकेक्षण विषय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम में पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कार्यकाल में 100 रुपये में से 15 रुपये ही वास्तविक लाभार्थी तक पहुंचते थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसान सम्मान निधि के 2000 रुपये के बटन पर अंगुली दबाते हैं तो पूरे 2000 रुपये करोड़ों किसानों के खाते में खटक से पहुंचते हैं। यह क्रांतिकारी बदलाव पूर्ववर्ती मनरेगा और उसके नए स्वरूप जी राम जी में भी दिखना चाहिए। संवाद