संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज में चल रहा दो दिवसीय नॉर्थ वेस्ट चेप्टर माइक्रोकॉन-2023 का शनिवार को समापन हुआ। दिल्ली, चंडीगढ़ समेत अलग-अलग स्थानों से आए डाॅक्टरों ने एंटीबायोटिक और एंटी फंगल दवाओं के प्रति शरीर में बन रही प्रतिरोधक क्षमता पर चिंता व्यक्त की। डॉक्टरों ने कहा कि बिना डाॅक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक या एंटी फंगल दवाएं ली जा रही हैं तो यह खतरनाक हैं। अगर प्रतिरोधक क्षमता बन जाती है तो दूसरी दवाएं काम करना बंद कर देती हैं।
सेमीनार के दूसरे दिन आईसीएमआर नई दिल्ली की डॉ. कामिनी वालिया, डॉ. मालिनी कपूर, मोहाली से डॉ. माला छाबड़ा, चंडीगढ़ से आए डॉ. पल्लब राय ने बताया कि बिना डॉक्टर के परामर्श के लोग दवाइयां ले लेते हैं। खुद की मर्जी से लोग दवाओं का सेवन करते है। जो कि काफी खतरनाक हो जाता है। ऐसे में शरीर में बैक्टीरिया और फंगस पर दवा काम नहीं करती हैं। एंटीबायोटिक सही समय पर लेनी होती है, तभी उसकी अहमियत है।
डॉक्टर ने जो दवा लिखी है, उसे ही लेना चाहिए। कौन सी एंटीबायोटिक दी जानी है, उस पर अस्पताल का पूरा प्रोटोकॉल होना चाहिए। अगर इंफेक्शन कम है तो अधिक क्षमता की एंटीबायोटिक नहीं दी जाए। हल्की एंटीबायोटिक दी जानी चाहिए। मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. जगदीश चंदेर दुरेजा उपस्थित रहे। इसके अलावा डॉ. दीपेंद्र, डॉ. हिमांशु मदान, डाॅ. सतीश खट्टर, डाॅ. वीनू गुप्ता, डाॅ. अपर्णा परमार, डॉ. प्रेरणा अग्रवाल आदि मौजूद रहीं।