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Karnal News: बाढ़ के कारण चीनी मिल को 10 करोड़ मुनाफे का नुकसान

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- गन्ने के अभाव में एक महीने पहले बंद हो गई करनाल की सहकारी चीनी मिल
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। 48 घंटे के मुफ्त पर्ची गन्ना खरीद के बाद बुधवार की रात दि सहकारी चीनी मिल करनाल बंद हो गई है। चीनी मिल ने 49.50 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई है। गत वर्ष जुलाई के प्रथम सप्ताह में बाढ़ से हुई आर्थिक क्षति सिर्फ किसानों को नहीं बल्कि चीनी मिल को भी झेलनी पड़ी है। गन्ने की फसल के बाढ़ से खत्म हो जाने के बाद चीनी मिल को गन्ने के अभाव में एक महीने पहले बंद करना पड़ा। पिछले साल से करीब सात लाख क्विंटल गन्ना कम मिला। मिल ने अपने चलने के समय में हरियाणा में सभी मिलों से अधिक क्षमता में पेराई कर रिकॉर्ड बनाया, घाटे में भी नहीं है लेकिन मिल को करीब 10 करोड़ रुपये के मुनाफे से हाथ धोना पड़ा।
सहकारी चीनी मिल करनाल ने 14 नवंबर 2023 को पेराई सत्र शुरू किया था। चीनी मिल में हरियाणा के करीब 128 से अधिक गांवों के गन्ना किसान चीनी मिल में गन्ना देते हैं। इसमें यमुना किनारे क्षेत्र के कई गांव शामिल हैं, पेराई शुरू होने से पहले जुलाई माह के प्रथम सप्ताह में यमुना नदी में आई बाढ़ से सैकड़ों एकड़ गन्ने और धान की फसल जलमग्न हुई। जिसमें बड़ी संख्या में बहकर आई रेत से खेत पट गए। इसमें करीब दो दर्जन से अधिक गांवों के सैकड़ों किसानोंं के गन्ने के खेत में पानी उतरने के बाद रेत और मिट्टी रह गई। जिसे समय से उठाया भी नहीं जा सका। परिणाम ये हुआ कि कुछ किसानों ने दोबारा धान तो लगाया लेकिन गन्ने की दोबारा बुवाई नहीं हो सकी और गन्ने का रकबा घट गया।
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कुल मिलाकर बाढ़ से किसानों को नुकसान हुआ ही है लेकिन इसका सीधा प्रभाव चीनी मिल पर भी पड़ा। चीनी मिल के प्रबंध निदेशक हितेंद्र कुमार शर्मा ने बताया कि बुधवार को मध्यरात्रि के बाद चीनी मिल बंद हो गई। बुधवार को अंतिम दिन यार्ड में गन्ना भरी ट्रालियों की लंबी लाइनें लगी रहीं। 149 दिन मिल ने अपनी 95.51 प्रतिशत क्षमता के साथ पेराई की जो हरियाणा में सहकारी मिलों में सर्वाधिक है। चीनी मिल ने 49.50 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई की है। जबकि पिछले साल 56.28 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई की गई थी लेकिन तब चीनी मिल एक महीना अधिक चली थी।
इस साल चीनी मिल ने 4.90 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन किया, पिछले साल ये उत्पादन 5.58 लाख क्विंटल था। चीनी मिल ने इस साल 56445900 किलो वाट प्रति घंटे (केडब्ल्यूएच) की दर से बिजली का उत्पादन किया। जिसमें 34735800 केडब्ल्यूएच का बिजली ग्रिड को बेचा। जिससे चीनी मिल को 28 करोड़ रुपये की आय हुई। जबकि पिछले साल 18 करोड़ रुपये की आय हुई थी। मिल में 18 मेगावाट प्रति घंटे की बिजली उत्पादन का प्लांट लगा है।
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चीनी मिल इस बार बिना किसी ब्रेक के अपनी पूरी क्षमता के साथ संचालित हुई। रिकॉर्ड बिजली उत्पादन किया। हरियाणा में सहकारी चीनी मिलों में सर्वाधिक बिजली ग्रिड को निर्यात की गई। जितने दिन मिल संचालित हुई, उसमें तो चीनी मिल बड़े मुनाफे में है, पहली बार चीनी मिल ने बिना किसी कर्ज लिए अपने दम पर दो से चार दिनों में किसानों को गन्ने की कीमत का भुगतान किया लेकिन पिछले साल बाढ़ के कारण चीनी मिल क्षेत्र में करीब सात लाख क्विंटल गन्ना इस बार चीनी मिल को कम मिला। जिसके कारण मिल को करीब 10 करोड़ रुपये के मुनाफे का नुकसान हुआ है। यदि मिल एक महीने और चलती तो ये अतिरिक्त मुनाफा मिल को होता।
- हिंतेंद्र कुमार शर्मा, प्रबंध निदेशक, दि सहकारी चीनी मिल करनाल
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