संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। कैंसर की जांच, ऑपरेशन, आईसीयू में देखभाल सहित कैंसर की लास्ट स्टेज पर पहुंचे मरीजों को दर्द से राहत प्रदान करने में एक एनेस्थीटिस्ट का अहम योगदान होता है। उनके हर गंभीर जांच व ऑपरेशन में योगदान के चलते प्रत्येक वर्ष 16 अक्तूबर को विश्व एनेस्थीसिया दिवस के रूप में मनाया जाता है। वर्ष 2024 की थीम कार्यबल कल्याण है। जो उनके चिकित्सा क्षेत्र में कार्यबल को दर्शाती है।
कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज के एनेस्थीसिया विभाग एवं क्रिटिकल केयर के प्रो. डॉ. गुंजन चौधरी ने बताया कि शरीर के किसी भी हिस्से में कैंसर की जांच करने के लिए एनेस्थीसिया का सहारा लिया जाता है। वहीं लगभग 80 प्रतिशत से अधिक केसों के ऑपरेशनों में भी एनेस्थीसिया का सहारा लिया जाता है। इसके बाद ऑपरेशन के बाद आईसीयू में मरीजों की देखभाल में एनेस्थीसिया का अहम रोल है।
उन्होंने बताया कि इसके अलावा कैंसर की लास्ट स्टेज यानी मृत्यु के करीब पहुंचे कैंसर मरीजों को असहनीय दर्द झेलना पड़ता है। वहीं उनको भ्रम का अनुभव होने लगता है। कैंसर के एक-चौथाई से अधिक रोगियों को मृत्यु से तीन से छह महीने पहले गंभीर दर्द का अनुभव होता है। ऐसे में विभिन्न दवाओं के इंजेक्शन देकर दर्द में राहत प्रदान करने का काम एक एनेस्थीटिस्ट ही करता है।
प्रो. डॉ. गुंजन चौधरी ने बताया कि वर्ष 1846 में विलियम थॉमसन ग्रीन मॉर्टर ने ईथर एनेस्थीसिया का प्रयोग कर एक मरीज को सर्जरी के दौरान होने वाले दर्द से राहत प्रदान की थी। उसके बाद से ही एनेस्थीसिया का महत्व बढ़ा है। यहां चाहे हड्डी का ऑपरेशन हो या फिर किसी गर्भवती की सिजेरियन डिलीवरी हो या फिर किसी भी गंभीर बीमारी का ऑपरेशन हो उसमें एनेस्थीसिया बहुत जरूरी है। उन्होंने बताया कि सर्जरी से पहले मरीज को बेहोश करना और बाद में उसे होश में लाना एक एनेस्थीसिया के कार्य है।