. एनएचएम की हड़ताल से जिला नागरिक अस्पताल की एसएनसीयू विंग प्रभावित
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। एनएचएम कर्मियों की हड़ताल से सबसे अधिक जिला नागरिक अस्पताल की विशेष नवजात शिशु चिकित्सा यूनिट (एसएनसीयू) में सेवाएं प्रभावित हैं। जहां एक शिफ्ट में तीन से चार नर्सिंग स्टाफ दाखिल नवजातों की देखरेख करती थी। अब यहां पर तीन शिफ्टों में तीन नर्सिंग स्टाफ यानी एक शिफ्ट में एक स्टाफ नर्स के कंधों पर पूरी एसएनसीयू विंग चलाई जा रही है। जिससे एसएनसीयू विंग में दाखिल नवजातों की जान जोखिम में है। फिलहाल 10 नवजात एसएनसीयू विंग में दाखिल हैं।
एनएचएम कर्मचारी साझा मोर्चा के तहत जिलेभर के 676 एनएचएम कर्मचारी नौ दिनों से हड़ताल पर हैं। एनएचएम के तहत एसएनसीयू विंग की नौ नर्सिंग स्टाफ हड़ताल में शामिल हैं। साथ ही पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में कार्यरत चार नर्सिंग स्टाफ, कंगारू मदर केयर यूनिट (केएमसी) में कार्यरत चार नर्सिंग स्टाफ सहित जिला शीघ्र हस्तक्षेप केंद्र (डीईआईसी) के भी सभी पांच स्टाफ हड़ताल में शामिल हैं। ऐसे में नवजात शिशुओं की जांच से लेकर देखभाल तक प्रभावित है। संवाद
एनएचएम की हड़ताल का असर डॉक्टरों पर भी पड़ रहा है। एसएनसीयू में एक स्टाफ के साथ शिशु रोग विशेषज्ञ को भी लगातार ड्यूटी करनी पड़ रही है। वहीं कार्यरत नर्सिंग स्टाफ बिना छुट्टी लिए प्रतिदिन नौ दिनों से ड्यूटी दे रही है। एसएनसीयू की व्यवस्था खराब होती देख रोजाना डॉक्टर एनएचएम में तैनात नर्सिंग स्टाफ को ड्यूटी पर आने के लिए मनाने की कोशिश कर रहे हैं।
नवजातों का ओएई टेस्ट भी बंद
एनएचएम की हड़ताल के कारण ओटोअकॉस्टिक एमिशन (ओएई) परीक्षण बंद पड़ा हुआ है। इस ओएई टेस्ट से ही पता चलता है कि नवजात में जन्मजात सुनने की समस्या तो नहीं है। अगर है तो उसका इलाज संभव है लेकिन समय रहते यह पता नहीं चलता तो उम्रभर न सुनने का दर्द झेलना पड़ सकता है। यह ओएई टेस्ट डिलीवरी के 24 घंटे तक ही करना होता है लेकिन ऑडियोलॉजिस्ट भी हड़ताल पर हैं। ऐसे में पिछले नौ दिनों से नागरिक अस्पताल में हो रही डिलीवरी के बाद नवजातों का ओएई टेस्ट बंद है।