जीवन की कठिनाइयों को अपनी हिम्मत और मेहनत से मात देने वाली नूपुर आज दूसरों की आंखों में रोशनी लौटाने का काम कर रही है। नेत्र सर्जन डॉ. नुपुर चराया तब छह साल की थीं जब उनके पिता का निधन हो गया था। परिवार में संघर्ष बढ़ गया। डॉ. नुपुर ने अपने जीवन की दिशा खुद तय की और कभी हार नहीं मानी। शैक्षणिक क्षेत्र में उनका नाम हमेशा गोल्ड मेडलिस्ट के रूप में चमकता रहा। दो बार उन्होंने एआईआईएमएस में आंखों के शल्य चिकित्सक के लिए प्रवेश परीक्षा दी। मुकाम सरकारी मेडिकल कॉलेज मेरठ रहा। इसके बाद उन्होंने फैलोशिप में विशेष प्रशिक्षण लिया, जिसमें रेटिना और अन्य जटिल आंखों के रोग शामिल थे। नुपुर ने अपनी एमबीबीएस की पढ़ाई लखनऊ के सरकारी कॉलेज से पूरी की और साथ ही एचएस नेत्र कोर्स ओस्थेल में भी किया। डाॅ. नुपुर नि:शुल्क चिकित्सा शिविर भी आयोजित करती हैं। करीब 2000 लोगों की आंखों की नि:शुल्क सर्जरी कर चुकी हैं। संवाद