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Karnal News: ताक पर नियम, खतरे में जान

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- विभाग ने भी नहींदिया ध्यान, सुविधा के नाम पर मोटा शुल्क लेने के बाद मनमर्जी से चलाते रहे स्कूल वाहन
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माई सिटी रिपोर्टर

करनाल। सुरक्षित स्कूल वाहन पॉलिसी स्कूली बच्चों की सुरक्षा और स्कूलों के लिए एक अनुशासन के रूप में बनाई गई थी लेकिन इस पॉलिसी को स्कूल संचालकों ने ताक पर रखा। जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए बेपरवाही से बच्चों को खतरे का सफर कराते रहे। ऐसा अब से नहीं बल्कि वर्षों से होता आ रहा है।

न तो स्कूलों ने पॉलिसी के नियम माने और न ही परिवहन विभाग के अधिकारियों ने ज्यादा ध्यान दिया। सामान्य जांच तक ही अधिकारी सीमित रहे। इधर, वाहन कंडम होते गए और बच्चों की सुरक्षा शून्य मात्र ही रह गई। सुरक्षित स्कूल वाहन पॉलिसी के 27 बिंदु हैं, जिनमें से आधे से ज्यादा बिंदुओं का बसों में पालन नहीं हुआ। कहीं बसों पर बोर्ड नहीं होते तो कहीं चालक-परिचालक का लाइसेंस पर्याप्त नहीं है।
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इसके अलावा सीसीटीवी बंद रहना और वाहन की फिटनेस होने जैसे मानक भी ग्रामीण बसों में टूटे हैं। जिले में करीब 450 स्कूलों की 1200 के करीब छोटी-बड़ी गाड़ियां बच्चों को लाने-लेजाने के लिए पंजीकृत हैं। इनमें कई वाहनों में बड़ी खामियां हैं। अब अधिकारी महेंद्रगढ़ हादसे के बाद सतर्क हुए तो सख्ती से जांच होने लगी है।



पॉलिसी के तहत स्कूल बसों में सुरक्षा मापदंड

- स्कूल बस पीले रंग और उस पर नीले गहरे रंग की पट्टी अनिवार्य है। आगे सफेद चमकीली, पीछे लाल व दोनों साइडों में पीले रंग की रिफ्लेक्टर पट्टी होनी चाहिए।



- बस का परमिट, पंजीकरण प्रमाणपत्र, बीमा, प्रदूषण प्रमाणपत्र आदि दस्तावेज पूरे हों।



- चालक अनुभवी और उसके साथ महिला सहायक व एक परिचालक भी होना चाहिए।



- गति नियंत्रण करने के लिए स्पीड गर्वनर हो। बस के आगे और पीछे स्कूल बस, स्कूल संचालक, पुलिस कंट्रोल नंबर व चाइल्ड हेल्प लाइन नंबर आदि लिखे हों।



- बसों में सीसीटीवी कैमरे हों, इनकी 15 दिन की रिकॉर्डिंग क्षमता होनी चाहिए। बस में जीपीएस का होना अनिवार्य है।



- चालक को कम से कम पांच साल का अनुभव होना चाहिए और इन पांच सालों में तीन बार से अधिक चालान नहीं कटा होना चाहिए।



- बच्चों की सुरक्षा के लिए नियुक्त किया गया स्टाफ, परिचालक, महिला सहायक पूरी तरह से ट्रेंड होने चाहिए।



- ड्यूटी के समय चालक-परिचालक अपनी वर्दी में हों। कमीज पर नेम प्लेट हो। बस पर हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगा होना भी जरूरी है।




हर माह स्कूल बसों की जांच करते हैं। अब 26 अप्रैल तक सरकार की ओर से बसों को दुरुस्त कराने का समय दिया गया है। महेंद्रगढ़ में हादसा होने पर कई वाहनों के चालान भी हुए थे। अब फिलहाल बसों की हालत सुधारने का समय दिया है। इसके बाद किसी को बख्शा नहीं जाएगा।
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- विजय देसवाल, जिला परिवहन अधिकारी



सुरक्षित स्कूल वाहन पॉलिसी बच्चों की सुरक्षा के लिए है। स्कूलों को इसका पालन करना होगा और अभिभावक भी इसे सजग होकर इसका ध्यान रखें। नियम तोड़ने वालों पर अब सख्ती करेंगे।
- सुदेश ठुकराल, जिला शिक्षा अधिकारी
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