- दास्तान-ए-अंबाला : टैगोर स्कूल में नाटक मंचन में बयां हुआ भारत का इतिहास
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। आजादी के अमृत महोत्सव के अंतर्गत दास्तान-ए-अंबाला नाटक का मंचन किया गया। जिसमें कलाकारों की ओर से प्रस्तुति के दौरान अंग्रेजों पर किए गए कटाक्ष ने दर्शकों को खूब हंसाया और अंग्रेजों द्वारा किए गए जुल्म के दृश्यों ने बच्चों को भावुक भी किया। कार्यक्रम में मुख्यातिथि के रूप में पहुंचे सीटीएम अमन कुमार ने दर्शकों को आजादी के वीर शहीदों के जीवन से प्रेरणा लेने के लिए प्रेरित किया।
सोमवार को सूचना, लोकसंपर्क, भाषा एवं संस्कृति विभाग की ओर से टैगोर बाल निकेतन स्कूल में दास्तान-ए-अंबाला नाटक का मंचन किया गया। नाटक का निर्देशन रंगकर्मी मनीष जोशी ने किया है। नाटक के दौरान आजादी के गुमनाम नायकों के त्याग व बलिदान की गौरवगाथा देख युवाओं ने भावुक पूर्ण माहौल में जोश के साथ कलाकारों का जोरदार तालियां बजाकर अभिनंदन किया। नाटक में दिखाया कि अंबाला की रानी दया कौर को जब रणजीत सिंह और डलहौजी से खतरा हुआ तो दया कौर ने हिंदुस्तान की पहली महिला फौज बनाई। अंग्रेजों ने यहां के लोगों को अपना गुलाम बनाने के लिए यहां पर व्यापार खत्म कर दिया। नाटक में उस समय की तवायफों के योगदान को भी दिखाया।
उस समय की मशहूर तवायफ हीरा बाई किस तरह अंग्रेजों से भिड़ी और राज उगलवाए यह सब इस नाटक में दिखाया गया। नाटक शुरू होता है आज के अंबाला से और अंबाला की खासियत जैसे मिक्सी, वैज्ञानिक उपकरण, पंजीकरण साहब गुरुद्वारा, सैंट पॉल चर्च का जिक्र होते होते 1857 से जुड़ जाता है नाटक।
हमें मिट्टी के प्रति रहना चाहिए समर्पित
सीटीएम अमन कुमार ने कहा कि हमें आजादी के वीर शहीदों के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्हीं के बलिदान की वजह से हमें आजादी प्राप्त हुई और आज हम खुली हवा में सांस ले रहे हैं। आजादी बड़े बलिदानों के बाद मिली है, हमें अपनी मिट्टी के प्रति समर्पित रहना चाहिए। कार्यक्रम में स्कूल प्रिंसिपल डॉ. राजन लांबा, निदेशक आरएम रहेजा विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने नाटक के निर्देशक मनीश जोशी की टीम को 11 हजार रुपये की राशि देकर सम्मानित भी किया। इस अवसर पर कर्ण रहेजा और डीआईपीआरओ मनोज कौशिक मौजूद रहे।
इन कलाकारों की रही मेहनत
निर्देशक मनीश जोशी ने बताया कि नाटक को हिसार, सिरसा, कैथल और करनाल में करवाया जा रहा है। अभिनय रंगमंच के कलाकारों ने इस नाटक को तैयार किया है। इस नाटक का लेखन यशराज शर्मा ने किया है, नृत्य संरचना डॉ राखी दूबे और संदीप नागर द्वारा की गई है। सह निर्देशन स्नेहा बिश्नोई द्वारा किया गया है। संगीत साहिल और प्रकाश व्यवस्था निपुण कपूर द्वारा की गई है। अभिनय रंगमंच के अध्यक्ष मनोज बंसल ने लोकसंपर्क विभाग के महानिदेशक डॉ. अमित अग्रवाल का विशेष तौर से धन्यवाद किया और कहा कि विभाग के सहयोग से आज नई पीढ़ी गुमनाम नायकों को जान पा रही है।