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धर्म परिवर्तन करने वाले सनातनी ने हमेशा उठाई हानि : साध्वी दीपमाला

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- साध्वी बोलीं, युवाओं को महापुरुषों, ऋषि-मुनियों के किस्से सुना प्रेरित करने की जरूरत
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संवाद न्यूज एजेंसी

करनाल। जिस सनातनी ने धर्म परिवर्तन किया, उसने जीवन में हानि ही उठाई है। गीता में लिखा गया है कि हमें अपने धर्म का पालन करना चाहिए। शास्त्रीय ज्ञान ही अज्ञानता के अंधकार को दूर कर समाज को नई दिशा देता है। सनातन धर्म की रक्षा के लिए महा पुराणों का अनुसरण अनिवार्य है। अयोध्या की धरती पर पुन: रामलला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा सनातनियों के लिए उसी पल को दोहराया गया है, जैसे श्रीराम के अयोध्या आगमन पर अयोध्यावासियों ने घी के दीये जलाए थे।
ये बातें ईश्वर प्रेम मिशन मुंबई की कथा वाचक साध्वी दीपमाला ने कहीं। वह सेक्टर-8 स्थित श्री राम मंदिर में आयोजित श्रीराम कथा में पहुंचीं हैं। यह कथा महंत श्री खुशहाल दास महाराज के आशीर्वाद से करवाई जा रही है। साध्वी दीपमाला से बातचीत के अंश इस प्रकार हैं-
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सवाल- देश में सनातन धर्म की रक्षा कैसे की जा सकती है, इस दिशा में संत-महात्माओं के क्या प्रयास हैं?
जवाब - भागवत, रामायण, पुराणों में लिखा गया है कि धर्म का पालन कैसे किया जाए। महा-पुराण ही हमें सिखाते हैं कि धर्म की रक्षा कैसे की जाए। सनातन धर्म की रक्षा के लिए ही महान ग्रंथ लिखे गए। इनका जीवन में अनुसरण अनिवार्य है।



सवाल- हिंदू बाहुल्य होने पर भी देश में धर्मांतरण के लगातार मामले आ रहे हैं, इसे कैसे रोका जाए?
जवाब - गीता में बड़ा सुंदर लिखा गया है कि ‘यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत’। जिस सनातनी ने धर्म परिवर्तन किया, उसने जीवन में हानि ही उठाई है। गीता में लिखा है कि हमें अपने धर्म का अनुसरण करना चाहिए। शास्त्रीय ज्ञान से ही धर्म की हानि को रोका जा सकता है।



सवाल- श्री राम मंदिर निर्माण देश के लिए बड़ी उपलब्धि है, इसे आप कैसे देखते हैं?
जवाब- अयोध्या में 22 जनवरी को श्रीराम लला का पुनः आगमन सनातनियों के लिए प्रसन्नता का विषय है। पूरे देश में इस दिन फिर से दीपावली मनाई गई। सनातनियों ने दिखा दिया कि जहां-जहां भी राम हैं वहीं आराम है। कलयुग में रामअवतार होने से हिंदुत्व को बल मिला है।



सवाल - युवाओं को धर्म व संस्कृति से कैसे जोड़ा जाए?
जवाब - युवाओं को धर्म व संस्कृति से जोड़ने के लिए उन्हें धर्म की शिक्षा परोसने का तरीका सही होना चाहिए। युवाओं को महापुरुषों, ऋषि-मुनियों के किस्से सुनाकर उनके जीवन को वर्तमान में आत्मसात करने के लिए प्रेरित करें।



सवाल : आज का युवा तेजी से विदेशों की ओर पलायन कर रहा है, इसे कैसे रोका जाए?
जवाब - आज परिवारों के बीच आपसी प्रेम खत्म हो रहा है। जबकि परिवार के सदस्यों का आपस में प्रेम, एक-दूसरे की भावनाओं को समझना जरूरी है तभी पलायन को रोका जा सकता है। अभिभावक बच्चे को नोट छापने की मशीन न बनाएं।
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अपील- सरकार को युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रेरित करना चाहिए ताकि युवा वर्ग भटकाव में न आए। सभी के सहयोग से विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करना होगा।
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