- नागरिक अस्पताल में रोजाना 100 की ओपीडी में 15 की करवाई जा रही जांच, जिनमें नाबालिग लड़कियां, युवतियां व महिलाएं शामिल
अनुज शर्मा
करनाल। शारीरिक अस्वच्छता, जीवन शैली में बदलाव और असुरक्षित यौन संबंध के कारण लड़कियों व महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर का खतरा बढ़ रहा है। साथ ही महिलाओं में स्तन कैंसर और पुरुषों में मुंह व गले के कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं।
नागरिक अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ की रोजाना करीब 100 की ओपीडी होती है जिसमें से 15 से अधिक नाबालिग लड़कियों, युवतियों व महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर की जांच के लिए पैप स्मीयर टेस्ट व बायोप्सी टेस्ट करवाएं जा रहे हैं। हालांकि प्रतिमाह मात्र एक केस कैंसर का सामने आता है, लेकिन गुप्तांग में संक्रमण बहुत अधिक मात्रा में मिल रहा है, जो कैंसर के शुरुआती लक्षणों में से एक है।
नागरिक अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. श्रुति शर्मा ने बताया कि सर्वाइकल कैंसर ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) एक यौन संचारित वायरस है। सभी वायरस की तरह एचपीवी कोशिकाओं में प्रवेश करके संक्रमण उत्पन्न करता है। एचपीवी के कई अलग-अलग प्रकार हैं। कुछ प्रकार गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न कर सकते हैं, जिनमें जननांग मस्से और कुछ प्रकार के कैंसर शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि लगभग 80 प्रतिशत गैर-टीकाकृत वयस्कों को उनके जीवन में कभी न कभी एचपीवी संक्रमण होगा, इसलिए एचपीवी से सुरक्षा बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि एचपीवी संक्रमण सामान्य संक्रमित व्यक्ति के साथ यौन संपर्क के दौरान सीधे त्वचा से त्वचा के संपर्क के माध्यम से होता है। यह वायरस गुप्तांग, गुदा व मुंह द्वारा संचारित होता है। ऐसे में महिलाएं गुदा कैंसर, योनि कैंसर व योनिमुख कैंसर की चपेट में आ सकती हैं। संवाद
उजाला सिग्नस अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. निकिता सचदेवा ने बताया कि एचपीवी संक्रमण होने की संभावना को कम करने के लिए कुछ उपाय किए जा सकते हैं। सबसे पहले टीका लगवाएं। एचपीवी टीका सुरक्षित और प्रभावी है। यह एचपीवी टीका विभिन्न आयु वर्गों की महिलाओं के लिए बनाया गया है। जो एचपीवी से संबंधित संक्रमणों और रोगों से सुरक्षा में सहायता करता है। वहीं 21 से 65 वर्ष तक की महिलाओं की नियमित जांच से सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम में मदद मिल सकती है। यदि महिलाएं यौन रूप में सक्रिय हैं तो उसे नियमित जांच करवानी चाहिए।