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Karnal News: रेलवे की परियोजनाओं को मिलेगी गति, अंतिम रिपोर्ट का इंतजार

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अंबाला रेल मंडल प्रबंधक कार्यालय। संवाद
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अंबाला। अंबाला रेलमंडल के अधीन तीन परियोजनाओं के जल्द पूरा होने की आस बंधी है जोकि अभी कागजों में ही चल रही है। इसमें यमुनानगर-चंडीगढ़, देहरादून-सहारनपुर और ऊना-हमीरपुर तक बिछने वाली रेलवे लाइनें शामिल हैं। इन रेलवे लाइनों की फाइनल सर्वे रिपोर्ट का इंतजार रेलवे को है, जिससे कि इसे नीति आयोग को मंजूरी के लिए भेजा जा सके।
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रेलवे द्वारा वित्तीय वर्ष 2024-25 में जारी की गई पिंक बुक में भी तीनों परियोजनाओं का जिक्र किया गया, हालांकि तीनों परियोजनाओं के लिए रेलवे ने इस बार भी मात्र तीन हजार रुपये का बजट जारी किया हैं। वहीं यमुनानगर-चंडीगढ़ रेल लाइन की लंबित हो रही परियोजनाओं से लोगों को भी मायूसी का सामना करना पड़ रहा है।
दस साल बाद भी अधूरी
यमुनानगर से चंडीगढ़ तक लगभग 91 किमी लंबी रेललाइन बिछाई जानी है। सीमित फंड के चलते केंद्र सरकार ने प्रोजेक्ट को सिरे चढ़ाने के लिए प्रदेश सरकार पर लागत का 50 फीसद भार डाला था ताकि रेललाइन बिछाने के लिए मुफ्त में जमीन मिल सके। लेकिन 10 साल के लंबे अंतराल के बावजूद अभी तक परियोजना कागजों से बाहर नहीं निकल पाई है। दरअसल यह योजना वर्ष 2009 में बनी थी और वर्ष 2013-14 में 91 किलोमीटर लंबी यमुनानगर-चंडीगढ़ रेलवे लाइन को बिछाने की मंजूरी मिली थी। वर्ष 2016-17 में इस परियोजना के तहत केंद्र सरकार ने 25 करोड़ स्वीकृत किए थे लेकिन इसके बाद यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
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1996 में हुआ था शिलान्यास
देहरादून से सहारनपुर तक रेल लाइन बिछाने की परियोजना का शिलान्यास तत्कालीन रेल राज्य मंत्री सतपाल महाराज की ओर से किया था लेकिन 28 साल बीत जाने के बाद भी यह योजना सिरे नहीं चढ़ पाई। बताया जा रहा है कि इस रेललाइन का सर्वे पूरा हो चुका है। इस परियोजना के तहत देहरादून से सहारनपुर तक 81 किलोमीटर लंबी रेलवे लाइन बिछाई जानी है। इस रेल लाइन के बिछने से तीन घंटे का सफर मात्र डेढ़ घंटे में पूरा हो जाएगा। रेललाइन के सर्वे के लिए रेल मंत्रालय की ओर से 2.3 करोड़ रुपये का बजट भी जारी किया था और परियोजना की डीपीआर 18 महीने में तैयार करने के निर्देश दिए थे।
वर्ष 2021 में बनी थी परियोजना
ऊना से हमीरपुर तक रेलवे लाइन बिछाने की प्रस्तावित योजना सांसद अनुराग ठाकुर के निर्देश पर वर्ष 2021 में तैयार की गई थी। लगभग 50.3 किलाेमीटर लंबी इस रेलवे लाइन में 11 सुरंगों का निर्माण प्रस्तावित है। इनमें एक सुरंग आठ किलोमीटर लंबी होगी, जो हमीरपुर के नजदीक बनेगी। इस रेलवे लाइन में 15 बड़े पुल भी निर्मित किए जाएंगे। इनमें से एक पुल 2.45 किलोमीटर लंबा होगा। जो इस रेलवे लाइन पर सबसे लंबा पुल होगा। जाे बड़े पुल बनेंगे, उनकी अधिकतम ऊंचाई 90 मीटर होगी। इस रेलवे लाइन के निर्माण पर लगभग 2850 करोड़ रुपये खर्च होने की उम्मीद जताई गई है।
वज
यमुनानगर-चंडीगढ़, देहरादून-सहारनपुर और ऊना-हमीरपुर तक बिछाई जाने वाली रेलवे लाइन का फाइनल सर्वे चल रहा है। रिपोर्ट आने के बाद इसका आंकलन किया जाएगा और चुनाव आचार संहिता के बाद फाइनल लोकेशन सर्वे की विस्तृत रिपोर्ट को प्रशासनिक मंजूरी के लिए रेलवे बोर्ड और नीति आयोग के पास भेजा जाएगा।
एमएस भाटिया, डीआरएम अंबाला।
यमुनानगर-चंडीगढ़, देहरादून-सहारनपुर और ऊना-हमीरपुर तक लाइन बिछाने पर चल रहा मंथन

संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। अंबाला रेलमंडल के अधीन तीन परियोजनाओं के जल्द पूरा होने की आस बंधी है जोकि अभी कागजों में ही चल रही है। इसमें यमुनानगर-चंडीगढ़, देहरादून-सहारनपुर और ऊना-हमीरपुर तक बिछने वाली रेलवे लाइनें शामिल हैं। इन रेलवे लाइनों की फाइनल सर्वे रिपोर्ट का इंतजार रेलवे को है, जिससे कि इसे नीति आयोग को मंजूरी के लिए भेजा जा सके।
रेलवे द्वारा वित्तीय वर्ष 2024-25 में जारी की गई पिंक बुक में भी तीनों परियोजनाओं का जिक्र किया गया, हालांकि तीनों परियोजनाओं के लिए रेलवे ने इस बार भी मात्र तीन हजार रुपये का बजट जारी किया हैं। वहीं यमुनानगर-चंडीगढ़ रेल लाइन की लंबित हो रही परियोजनाओं से लोगों को भी मायूसी का सामना करना पड़ रहा है।
दस साल बाद भी अधूरी
यमुनानगर से चंडीगढ़ तक लगभग 91 किमी लंबी रेललाइन बिछाई जानी है। सीमित फंड के चलते केंद्र सरकार ने प्रोजेक्ट को सिरे चढ़ाने के लिए प्रदेश सरकार पर लागत का 50 फीसद भार डाला था ताकि रेललाइन बिछाने के लिए मुफ्त में जमीन मिल सके। लेकिन 10 साल के लंबे अंतराल के बावजूद अभी तक परियोजना कागजों से बाहर नहीं निकल पाई है। दरअसल यह योजना वर्ष 2009 में बनी थी और वर्ष 2013-14 में 91 किलोमीटर लंबी यमुनानगर-चंडीगढ़ रेलवे लाइन को बिछाने की मंजूरी मिली थी। वर्ष 2016-17 में इस परियोजना के तहत केंद्र सरकार ने 25 करोड़ स्वीकृत किए थे लेकिन इसके बाद यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
1996 में हुआ था शिलान्यास
देहरादून से सहारनपुर तक रेल लाइन बिछाने की परियोजना का शिलान्यास तत्कालीन रेल राज्य मंत्री सतपाल महाराज की ओर से किया था लेकिन 28 साल बीत जाने के बाद भी यह योजना सिरे नहीं चढ़ पाई। बताया जा रहा है कि इस रेललाइन का सर्वे पूरा हो चुका है। इस परियोजना के तहत देहरादून से सहारनपुर तक 81 किलोमीटर लंबी रेलवे लाइन बिछाई जानी है। इस रेल लाइन के बिछने से तीन घंटे का सफर मात्र डेढ़ घंटे में पूरा हो जाएगा। रेललाइन के सर्वे के लिए रेल मंत्रालय की ओर से 2.3 करोड़ रुपये का बजट भी जारी किया था और परियोजना की डीपीआर 18 महीने में तैयार करने के निर्देश दिए थे।
वर्ष 2021 में बनी थी परियोजना
ऊना से हमीरपुर तक रेलवे लाइन बिछाने की प्रस्तावित योजना सांसद अनुराग ठाकुर के निर्देश पर वर्ष 2021 में तैयार की गई थी। लगभग 50.3 किलाेमीटर लंबी इस रेलवे लाइन में 11 सुरंगों का निर्माण प्रस्तावित है। इनमें एक सुरंग आठ किलोमीटर लंबी होगी, जो हमीरपुर के नजदीक बनेगी। इस रेलवे लाइन में 15 बड़े पुल भी निर्मित किए जाएंगे। इनमें से एक पुल 2.45 किलोमीटर लंबा होगा। जो इस रेलवे लाइन पर सबसे लंबा पुल होगा। जाे बड़े पुल बनेंगे, उनकी अधिकतम ऊंचाई 90 मीटर होगी। इस रेलवे लाइन के निर्माण पर लगभग 2850 करोड़ रुपये खर्च होने की उम्मीद जताई गई है।
वर्जन
यमुनानगर-चंडीगढ़, देहरादून-सहारनपुर और ऊना-हमीरपुर तक बिछाई जाने वाली रेलवे लाइन का फाइनल सर्वे चल रहा है। रिपोर्ट आने के बाद इसका आंकलन किया जाएगा और चुनाव आचार संहिता के बाद फाइनल लोकेशन सर्वे की विस्तृत रिपोर्ट को प्रशासनिक मंजूरी के लिए रेलवे बोर्ड और नीति आयोग के पास भेजा जाएगा।
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एमएस भाटिया, डीआरएम अंबाला।
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