अध्यात्म को व्यवहार में उतारना ही कर्म योग : दीपमाला
- श्री रघुनाथ मंदिर सभा की ओर से आयोजित की जा रही श्रीमद्भागवत कथा
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। श्री रघुनाथ मंदिर सभा ( ट्रस्ट ) की ओर से आयोजित श्रीमद्भागवत कथा उत्सव के पांचवें दिन शनिवार को दीपमाला जी ने कहा कि अध्यात्म को व्यवहार में उतारना ही कर्म योग है। भगवान श्री कृष्ण ने कुरुक्षेत्र के मैदान में अर्जुन को गीता का उपदेश दिया कि हे पार्थ तुम्हारा अधिकार सिर्फ कर्म करने में है, उसके फल में नहीं इसलिए अनासक्त होकर युद्ध करो।
कथाव्यास ने कहा कि अपने परिजनों, सगे संबंधियों के प्रति मोह और आसक्ति का त्याग करो। श्रीमद् भागवत महापुराण के तृतीय स्कंध में कर्दम और देव हेतु के गर्भ से साक्षात हरी श्री कपिल देव भगवान के रूप में प्रकट हुए जिन्होंने सांख्य शास्त्र का प्रचार किया। माता देव हेतु को भक्ति योग अष्टांग योग का उपदेश देकर उनके मोह को समाप्त किया। रघुनाथ मंदिर में वामन भगवान का प्राकट्य दिवस धूमधाम से मनाया गया। कथा में मुख्य अतिथि के रूप में मुख्य अभियंता जेपी सिंह रहे। कथा में मुख्य यजमान के रूप में सत्यपाल खेतरपाल, सतीश चावला, डॉ. कमल चराया, अमित खेतरपाल, राजपाल टुटेजा रहे। कथा में मुख्य रूप से प्रधान बलदेव खेतरपाल, विनोद खेतरपाल, दिनेश छाबड़ा, विनीत भाटिया, अमित आहूजा, मीणा शर्मा आदि मौजूद रहे।