जिले में रजिस्टर्ड छह बच्चे 2024 में हुए थैलेसीमिया मुक्त
उज्ज्वल डोनर क्लब ने छह बच्चों का कराया बोन मैरो ट्रांसप्लांट
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। आठ मई यानी आज विश्व थैलेसीमिया दिवस है। वर्ष 2024 में जीवन को सशक्त बनाना, प्रगति को अपनाना : सभी के लिए समान और सुलभ थैलेसीमिया उपचार, थीम पर विश्व थैलेसीमिया दिवस मनाया जा रहा है। इस थीम को जिले का उज्ज्वल डोनर क्लब को सार्थक करने के प्रयास में जुटा हुआ है। बता दें कि, वर्ष 2023 में जिले में 126 केस रजिस्टर्ड थे। उज्ज्वल डोनर क्लब ने अपने और आमजन के सहयोग से रजिस्टर्ड छह मरीजों का वर्ष 2024 जनवरी में बोन मैरो ट्रांसप्लांट करवाकर मरीजों और उनके परिवार का भविष्य उज्ज्वल किया है।
उज्ज्वल डोनर क्लब से संदीप ने बताया कि क्लब पिछले सात सालों से थैलेसीमिया पीड़ित मरीजों के लिए कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि थैलेसीमिया बच्चों को उनके माता-पिता से मिलने वाला आनुवांशिक रोग है। जिसकी पहचान बच्चे के जन्म के तीन महीने बाद ही हो पाती है।
यही वजह है कि लोगों को रक्त संबंधित इस गंभीर बीमारी के प्रति जागरूक होना बहुत जरूरी है। इस बीमारी का पता चलने के बाद भी इससे बचा नहीं जा सकता है। हंसने-खेलने की उम्र में बच्चे लाचार हो जाते हैं। बच्चे को लेकर माता-पिता ब्लड बैंक के चक्कर काटने को मजबूर हो जाते हैं। ऐसे में थैलेसीमिया बीमारी से बचाव का एक मात्र तरीका दो माइनर थैलेसीमिक युवक-युवती के बीच होने वाले विवाह को रोकना है। इसके लिए किसी भी युवक-युवती को विवाह से पहले अपना एचबीए-2 (हीमोग्लोबिन ए-2) का जांच करवाना चाहिए। इससे आने वाली नई पीढ़ी को थैलेसीमिया जैसी गंभीर बीमारी से बचाया जा सके।
दो प्रकार का होता है थैलेसीमिया रोग
ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. संजय वर्मा ने बताया कि थैलेसीमिया दो प्रकार का होता है। पैदा होने वाले बच्चे के माता-पिता, दोनों के जींस में माइनर थैलेसीमिया है तो बच्चे में मेजर थैलेसीमिया हो सकता है। जो घातक है। अभिभावकों में से एक को माइनर थैलेसीमिया होने पर बच्चे को थैलेसीमिक होने की संभावना कम होती है। ऐसे में दो माइनर थैलेसीमिक के बीच विवाह रोका जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि वर्ष वर्ष 2023 में 7185 यूनिट ब्लड एकत्रित हुआ था। जिसका 28.2 प्रतिशत यानी 2028 यूनिट ब्लड अकेले थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों को दिया गया है। यह आंकड़ा एक बड़ी चिंता का विषय है।
लक्षण और बचाव
पीएमओ डॉ. बलवान सिंह ने बताया कि बार-बार बीमार होना, सर्दी, जुकाम रहना, कमजोरी और उदास रहना, आयु के अनुसार शारीरिक विकास न होना, शरीर में पीलापन, दांत बाहर की ओर निकल आना, सांस लेने में तकलीफ होना इसके लक्षण हैं। कई तरह का संक्रमण भी होता है। इससे बचाव के लिए विवाह से पहले महिला-पुरुष रक्त की जांच कराएं, गर्भावस्था के दौरान इसकी जांच कराएं, मरीज का हीमोग्लोबिन 11 या 12 बनाए रखने की कोशिश करें, समय पर दवाएं लें और इलाज पूरा लें।