- 156 तक पहुंचा वायु गुणवत्ता सूचकांक, दिवाली तक बिगड़ सकती है स्थिति
राकेश चौहान
करनाल। जिले में वायु प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। जिस कारण वायु गुणवत्ता सूचकांक 156 तक पहुंच चुका है। यह शहर के सेक्टर-12 व आसपास के क्षेत्र का है लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में रात के समय कोहरा छाने लगा है। जिसका सीधा असर शहर के वातावरण पर पड़ रहा है।
बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए जिले में लकड़ी, कोयला, कोयले की अंगीठी आदि पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। सड़क निर्माण के दौरान ठेकेदार को बार-बार पानी का छिड़काव करना होगा, ताकि धूल न उड़े। साथ ही बिना ड्यूल फ्यूल कीट के चलने वाले जेनरेटरों पर भी रोक लगाई गई है। ताकि वायु प्रदूषण का स्तर न बढ़े और लोगों का स्वास्थ्य ठीक रहे। हवा में हर रोज बढ़ रहे प्रदूषण से साफ है कि आने वाले समय में शहर की हवा जहरीली हो जाएगी और जिससे लोगों का स्वास्थ्य बिगड़ने की संभावना है क्योंकि अभी तक दिवाली आने में भी कई दिन शेष हैं।
अकसर दिवाली के दिनों में ही पटाखों की वजह से वायु प्रदूषण सबसे अधिक होता है लेकिन अब दिवाली से पहले ही वायु प्रदूषण बढ़ने लगा है। जो चिंता का विषय है। अधिकारियों को उद्योगों पर भी नजर रखनी चाहिए।
55 जगहों पर जले फसल अवशेष
वायु प्रदूषण बढ़ने का मुख्य कारण फसल अवशेष जलाना भी है। हालांकि जिला प्रशासन फसल अवशेष जलाने को लेकर सख्त है। जिले में 15 सितंबर से 16 अक्तूबर तक विभाग के सामने 55 जगहों पर फसल अवशेष जलाने के मामले सामने आए हैं। इनमें विभाग ने किसानों पर 87500 रुपये तक का जुर्माना लगाया है। वहीं 17 किसानों पर मामले भी दर्ज कराए हैं।
यूं बढ़ता जा रहा वायु प्रदूषण
तिथि एक्यूआई
11 अक्तूबर - 69
12 अक्तूबर - 82
13 अक्तूबर - 126
14 अक्तूबर - 151
15 अक्तूबर - 139
16 अक्तूबर - 156
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वायु गुणवत्ता सूचकांक का स्तर
0 से 50 तक अच्छा
51 से 100 तक संतोषजनक
101 से 200 तक मध्यम
201 से 300 तक खराब
301 से 400 तक ज्यादा खराब
400 से ज्यादा होने पर बेहद खराब
सांस के रोगी बढ़े
हवा में प्रदूषण का स्तर बढ़ने से सांस के रोगियों पर सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ता है। ऐसे में सांस के मरीजों की तकलीफ बढ़ने लगी है। क्योंकि नागरिक अस्पताल और कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज में सांस के रोगियों की संख्या बढ़ने लगी है। वहीं रात को घर से बाहर निकलने पर आंखों में जलन भी होने लगी है। यह मामले भी अस्पताल में आ रहे हैं। नागरिक अस्पताल के छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप ने बताया कि इस दौरान मास्क का प्रयोग अवश्य करें। सांस के रोगियों को सांस लेने में परेशानी आए तो तुरंत डॉक्टर से जांच कराएं।
जिले में भी ग्रैप की शर्त लागू कर दी गई है। ऐसे में कहीं भी आग लगने की घटना नहीं होनी चाहिए। यदि अवशेष जलाए जाते हैं तो संबंधित विभाग को उस पर कार्रवाई करनी है। लोगों से अपील है कि वह लकड़ी, कोयला आदि न जलाएं, जिस कार्य में धूल उड़ती है वहां बार-बार पानी का छिड़काव करें।
- शैलेंद्र अरोड़ा, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी