- जिला अस्पताल की ओपीडी में रोज आने वाली 35 महिलाओं में से 22 की उम्र 14 से 25 वर्ष के बीच
- पॉलीसिस्टिक ओवरी डिजीज से महिलाओं में अनियमित माहवारी की बढ़ रही समस्या
अनुज शर्मा
करनाल। किशोरियों और युवतियों को पीसीओडी कम उम्र में ही अपना (पॉलीसिस्टिक ओवरी डिजीज) शिकार बना रहा है। पीसीओडी की समस्या लेकर आने वाली कुल मरीजों में से 62.85 की उम्र 14 से 25 है। स्त्री रोग विशेषज्ञों की मानें तो यह चिंताजनक है। इसकी बड़ी वजह बिगड़ चुकी जीवनशैली है। सिविल अस्पताल में एलोपैथ, होम्योपैथ और आयुर्वेद विभागों की ओपीडी में पीसीओडी से ग्रसित रोज औसतन 35 महिलाएं पहुंचती हैं। डॉक्टरों के लिए चिंता की बात यह है कि इनमें से औसतन 22 मरीज की उम्र 14 से 25 वर्ष के बीच है।
सिविल अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. श्रुति शर्मा ने बताया कि पीसीओडी की बीमारी में महिलाओं के शरीर में हार्माेन्स का संतुलन बिगड़ने से ओवरी यानी अंडाशय में पानी की गांठ बनने लगती है। इसके कारण महिला को गर्भधारण में दिक्कत आती है। उनकी माहवारी अनियमित होने से परेशानी होती है। इसकी मुख्य वजह अनियमित जीवनशैली है। व्यायाम से दूरी और फास्ट फूड से लगाव के साथ ही तनाव इसकी बड़ी वजह है। इससे निजात पाने के लिए लड़कियों व महिलाओं को स्वस्थ जीवनशैली अपनानी होगी और बेहतर खानपान से ही इस बीमारी से छुटकारा मिल सकता है।
पीसीओडी के लक्षण
स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. धीरज सिंह ने बताया कि पीसीओडी होने पर मुंह पर बाल आने लगते हैं। वजन का बढ़ना शुरू हो जाता है। संतुलित खानपान से इस स्थिति पर काबू पाया जा सकता है। रिफाइंड में बने खाद्य पदार्थ, ब्रेड, केक, सफेद चावल, कैंडी, आलू और तलाभुना भोजन खाने से बचना चाहिए। साथ ही फाइबर युक्त आहार लेना चाहिए। साबुत अनाज लें, संतुलित मात्रा में वसा की मात्रा लें, हरी सब्जियां खाएं, पौष्टिक फल खाएं व प्रोटीन युक्त भोजन का सेवन करें। इसके साथ व्यायाम बहुत जरूरी है।
कोरोना काल के बाद बढ़ी समस्या
सिविल अस्पताल से आयुर्वेदिक डॉ. सुनील गुप्ता और होम्योपैथिक डॉ. मनप्रीत कौर ने बताया कि कोरोना काल के बाद लड़कियों व महिलाओं में पीसीओडी की बीमारी अधिक पनप रही है, क्योंकि कोरोना काल में सब लोग अपने घरों में कैद थे। किसी ने अपने शरीर पर विशेष ध्यान नहीं दिया और हर रोज नए-नए तरह के फास्ट फूड का अधिक प्रयोग करने से यह समस्या बढ़ी है। आयुर्वेदिक ओपीडी में रोजाना एक और होम्योपैथिक में रोजाना तीन मरीज आ रहे हैं।
अकेलापन व अत्यधिक दबाव से बढ़ रहा तनाव
क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट संतोष एवं सोशल वर्कर विकास ने बताया कि मनोरोग ओपीडी में रोजाना 14 से 25 वर्ष तक की लगभग 12 से 15 लड़कियां आ रही हैं। जिनसे बातचीत करने पर सामने आया है कि कुछ में माता-पिता से दूरी के कारण अकेलापन बढ़ रहा है तो कुछ पढ़ाई में अच्छे नंबर व जल्दी नौकरी लगकर अपने पैरों पर खड़े होने के बढ़ते दबाव के कारण तनाव बढ़ रहा है। ऐसे में उनके शरीर में हार्माेन का संतुलन बिगड़ रहा है और उनमें पीसीओडी की समस्या बढ़ रही है।
पीसीओडी में योग से मिलेगी निजात
योग सहायक रीटा शर्मा ने बताया कि पीसीओडी में लड़कियों व महिलाओं के पेट के आसपास चर्बी बढ़ जाती है। प्रजनन क्षेत्र में रक्त संचार धीमा पड़ जाता है। इससे निजात पाने के लिए रोज बटरफ्लाई आसन, नौकासन, सूर्य नमस्कार, प्राणायाम, अनुलोम-विलोम और कपालभाती करना चाहिए। इन आसनों से शरीर की चर्बी कम होगी और रक्त का संचार बेहतर होगा। जिससे गर्भधारण की संभावना बढ़ेगी।