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Karnal News: आईएम की हड़ताल से इलाज के लिए भटके मरीज

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संवाद न्यूज एजेंसी
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करनाल। राजस्थान में स्वास्थ्य के अधिकार संबंधी विधेयक के विरोध में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने मंगलवार को अस्पताल, ओपीडी और इमरजेंसी सेवाएं बंद रखीं। इस कारण मरीज इलाज के लिए दिनभर ठोकरें खाते दिखे। अमर उजाला की टीम ने मंगलवार को मरीजों को हुई दिक्कतों का जायजा लिया। इस दौरान अधिकतर अस्पताल पूरी तरह बंद मिले तो कुछ में ओपीडी और इमरजेंसी सेवाएं जारी मिलीं। वहीं मरीज एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल चक्कर काटते रहे।
दयाल सिंह कॉलोनी स्थित गुरुनानक अस्पताल में सुबह 11:21 बजे सन्नाटा पसरा मिला। ओपीडी के बाहर रखीं कुर्सियां खाली मिलीं। इसके साथ ही लगते ही एक और निजी अस्पताल दुआ स्पेशलिटी सेंटर में 11:27 बजे सुरक्षा गार्ड मरीजों को वापस भेजता दिखा। सुरक्षा गार्ड ने बताया कि हड़ताल के चलते डॉक्टरों की छुट्टी कर दी गई है। सुबह 11:36 बजे से इसी मार्ग पर स्थित विर्क अस्पताल मरीजों से खचाखच भरा मिला। मरीज पंजीकरण केंद्र पर स्लिप कटवाने के साथ ही डिस्पेंसरी से दवा लेते दिखे।
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सुबह 11:48 बजे कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज में मरीज ओपीडी के बाहर बैठे मिले। महावीर जयंती की छुट्टी के चलते ओपीडी बंद मिली। मरीज परेशान होकर लौटते मिले। दोपहर 12:09 बजे सिविल अस्पताल के ट्रामा सेंटर के अंदर ओपीडी चलती मिली। अस्पताल की डिस्पेंसरी भी खुली मिली, जहां मरीजों को परामर्श दिया जा रहा था।

मरीजों के लिए छुट्टी में भी खुली सरकारी अस्पताल की डिस्पेंसरी
सिविल अस्पताल की पीएमओ डॉ. रेणू चावला ने बताया कि चार अप्रैल को महावीर जयंती को लेकर सरकारी अस्पतालों में छुट्टी रही लेकिन प्रदेश में आईएमए की हड़ताल को देखते हुए सिविल अस्पताल की डिस्पेंसरी खोली गई। ट्रामा सेंटर में एक मेडिकल ऑफिसर ने सामान्य मरीजों का चेकअप किया और उन्हें डिस्पेंसरी से दवा दिलवाई गई। डिस्पेंसरी में सीनियर फार्मेंसी ऑफिसर ममता त्यागी, राजेश सिंगला, इंटर्न चाहत, प्रियांशु व जीडीए रेखा ने छुट्टी के दिन भी सेवाएं दी।

- बोले मरीज
कई दिनों से बुखार आ रहा है तो आज अस्पताल आया था लेकिन ओपीडी बंद मिली। काफी समय से ओपीडी के बाहर बैठा हुआ हूं। शायद कोई डॉक्टर आ जाए। - खजान चंद, मरीज

कई दिनों से बेटी के पेट में दर्द हो रहा था तो अस्पताल में चेकअप कराकर दवा लेने आए थे लेकिन क्या पता था कि आज छुट्टी है। अब बिना दवा के ही जाना पड़ रहा है। - विजय कुमार, मरीज
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एक निजी अस्पताल में आंखों की दवा लेने के लिए आई थी लेकिन छुट्टी के कारण बिना दवा के लिए लौटना पड़ा। - शांति देवी, मरीज

एक निजी अस्पताल में घुटने का इलाज कराने के लिए आई थी। वहां ओपीडी बंद मिली तो केसीजीएमसी में पहुंची तो यहां भी बंद मिली। अब घर जा रही हूं। - ज्ञानी देवी, मरीज

असंध से इतनी दूर केसीजीएमसी में अपनी बहन की दौरे की दवा लेने आया था लेकिन यहां पर ओपीडी बंद मिली। - अक्षय कुमार, तीमारदार
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