संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। एनएचएम कर्मी तीसरे दिन भी हड़ताल पर रहे। इस कारण जिले के अधिकतर अस्पतालों में मरीजों को इलाज नहीं मिल पाया। जिला प्रधान संजीव ने कहा की एनएचएम कर्मियों के लिए हड़ताल मजबूरी बन गई है। वे पिछले छह वर्षों से आंदोलनरत हैं। इस दौरान कोई मंत्री या विधायक नहीं रहा, जिसे उन्होंने अपनी समस्याओं से अवगत नहीं करवाया हो, ऐसा कोई अधिकारी नहीं जिसके साथ बैठक नहीं की गई हो। ना तो किसी मंत्री और न ही किसी अधिकारी ने उनकी मुख्य मांगों पर कोई संज्ञान लिया।
उन्होंने बताया कि कोविड–19 में एनएचएम कर्मचारियों के उत्कृष्ट कार्य को देखते हुए सरकार की ओर से एनएचएम कर्मियों को सातवें वेतन आयोग का लाभ देने की सैद्धांतिक मंजूरी दी गई लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज तीन साल बाद भी सातवां वेतन न केवल फाइलों की धूल फांक रहा बल्कि वित्त विभाग की ओर से सरकार के इशारे पर सेवा नियम को फ्रीज करने व वेतन को समेकित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। मौके पर सुरेश नरवाल, सतीश धीमान, प्रमोद शर्मा, देविदत, सुमन, राजेश अत्री मौजूद रहे।
जिला महासचिव गोपाल शर्मा ने कहा कि सरकार कर्मचारियों की मांगों पर ध्यान दे। अन्यथा कर्मचारी अपने अधिकारों के लिए किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार हैं। यदि सरकार उनकी मांगों को नहीं मानती है तो आंदोलन तेज होगा।