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Karnal News: हड़ताल से ऑपरेशन और मनोरोग काउंसलिंग ठप

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- सिविल सर्जन कार्यालय का काम रुका, कई मरीज बिना इलाज लौटे, मांगों के समर्थन में डटे एनएचएम कर्मी
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) के तहत जिलेभर के एनएचएम कर्मियों की हड़ताल से मनोरोग काउंसलिंग व ऑपरेशन ठप रहे। वहीं स्वास्थ्य जांच और डिलीवरी प्रभावित रही। हालांकि हड़ताल खत्म होने के बाद शनिवार को सभी डॉक्टर ओपीडी में पहुंचे और मरीजों का इलाज किया लेकिन अधिकतर मरीजों को इलाज नहीं मिल सका। शनिवार की ओपीडी लगभग 1256 रही।
इस दौरान नागरिक अस्पताल में विशेष रूप से लेबर रूम, एनसीडी क्लीनिक, स्त्री रोग विशेषज्ञ, मनोरोग विशेषज्ञ, नेत्र रोग विशेषज्ञ सहित फिजियोथेरेपी विभाग की ओपीडी में मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। अस्पताल प्रबंधन ने नर्सिंग विद्यार्थियों सहित पक्के कर्मचारियों को सभी विभागों में तैनात किया था उसके बावजूद अधिकतर मरीजों को बिना इलाज लौटना पड़ा। नेशनल हेल्थ मिशन के तहत प्रदेशभर के एनएचएम कर्मी लगातार दूसरे दिन हड़ताल पर रहे। हड़ताल के दौरान मनोरोग विशेषज्ञ के काउंसलिंग कक्ष के बाहर करीब 10-12 मरीज खड़े हुए इंतजार करते मिले। करीब दो घंटे तक इंतजार करने के बाद बिना काउंसलिंग के लौट गए।
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सिविल सर्जन कार्यालय का काम ठप
एनएचएम कर्मियों की हड़ताल के कारण सिविल सर्जन कार्यालय का काम ठप रहा। कार्यालय से किसी भी तरह की जांच रिपोर्ट उप-सिविल सर्जन व सिविल सर्जन को उपलब्ध नहीं हो पाई। 28 जुलाई को हेपेटाइटिस-डे है, लेकिन जिले में कितने हेपेटाइटिस के कितने मरीज हैं और कितनों का इलाज चल रहा है। इसकी रिपोर्ट भी एनएचएम कर्मी को तैयार करनी थी लेकिन उनके एक दिन पहले हड़ताल पर चले जाने के कारण यह रिपोर्ट उन्हें उपलब्ध नहीं हो सकी। सुरक्षित जननी माह, एनीमिया मुक्त भारत अभियान, टीबी, आयुष्मान योजना का रिकार्ड भी एनएचएम कर्मी ही संभालते हैं। इन सभी का कार्य पूरी तरह ठप है।
महज एक डिलीवरी हो पाई
हड़ताल का असर सबसे अधिक डिलीवरी व स्त्री रोग विशेषज्ञ की ओपीडी पर दिखाई दिया। जहां एक दिन पहले डॉक्टरों व एनएचएम कर्मियों के हड़ताल के कारण एक भी डिलीवरी नहीं हो पाई थी वहीं शनिवार को डॉक्टरों के ओपीडी में लौट आने के बावजूद डिलीवरी वार्ड में एक ही डिलीवरी हो पाई। जहां पहले रोजाना 10 से 15 केस हो पाते थे। इसके अलावा फिजियोथैरेपी विभाग में डॉक्टर के न होने के चलते एक भी मरीज की फिजियोथेरेपी नहीं हो पाई। वहीं सामान्य दिनों में 25 से 30 के बीच में मरीज अपनी फिजियोथेरेपी करवाने के लिए आते हैं।
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एनएचएम कर्मियों की मुख्य मांगें-
एनएचएम कर्मियों को पॉलिसी बनाकर नियमित किया जाए, जब तक नियमितीकरण की पॉलिसी बने तब तक उन्हें सेवा सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा, आर्थिक सुरक्षा, एक्सग्रेसिया व अपील और सजा हरियाणा सिविल सेवा नियम के अनुसार प्रदान की जाए। एनएचएम के सेवा नियम हरियाणा सरकार की पहल व एनएचएम गवरनिंग बॉडी के अनुमोदन के बाद वित्त विभाग से अनुमति लेते हुए कर्मचारियों पर लागू किए गए हैं। सेवा नियमों में रह गई त्रुटियों व वेतन विसंगतियों को ठीक करने के लिए संघ के साथ वार्ता करके उन्हें दूर किया जाए। आयुष्मान भारत योजना के तहत सीएचओ कैडर की एसओपी को लागू किया जाए आदि मांगें हैं।
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