करनाल। मई के महीने में हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश आदि राज्यों में प्याज की घरेलू फसल आने के बावजूद प्याज पिछले साल से करीब दोगुने भाव पर बिक रहा है। जिसके पीछे लोक सभा चुनाव में किसानों की नाराजगी से बचने के लिए महाराष्ट्र व मध्यप्रदेश से प्याज के निर्यात पर रोक न लगना माना जा
रहा है।
जिसका लाभ उठाते हुए इन राज्यों के किसानों ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में महंगे दाम मिलने के कारण अधिकतर प्याज निर्यात कर दिया। जिसका असर आने वाले दिनों में भी दिख सकता है।
हरियाणा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश आदि में रबी मौसम के प्याज की खोदाई मई महीने में हो जाती है। जिसकी आपूर्ति घरेलू बाजार में तो होती ही है, साथ ही किसान इसका भंडारण भी करते हैं, ताकि त्योहारी सीजन की पूर्ति की जा सके लेकिन हरियाणा, पंजाब आदि में इसकी खेती कम होती है, इसलिए घरेलू बाजार की खपत की आवश्यकता की पूर्ति के लिए महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश की मंडियों से प्याज को लाया जाता है।
करनाल के सब्जी एवं फल आढ़ती एसोसिएशन के पूर्व प्रधान एवं प्रमुख आढ़ती किशन सचदेवा बताते हैं कि भारतीय घरेलू बाजार में सर्वाधिक प्याज की खपत अक्तूबर व नवंबर माह में होती है, जिसका कारण है कि इन महीनों में अधिकतर बड़े त्योहार होते हैं और शादियों का मौसम भी होता है।
उन्होंने बताया कि हर साल जब भी घरेलू बाजार में प्याज की कीमतें बढ़ती थी तो केंद्र सरकार प्याज के निर्यात पर रोक लगा देती थी लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ, क्योंकि ये चुनावी मौसम था, सरकार को भय था कि कहीं प्याज के निर्यात पर रोक लगाने से किसान नाराज न हो जाएं।
परिणाम ये हुआ कि अप्रैल-मई में अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्याज की कीमतें बढ़ी हुई थी, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश आदि में घरेलू प्याज की खोदाई से पूर्व का समय था। स्टाॅक लगभग खत्म हो चुके थे।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में महंगे दाम मिलने के कारण महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश के किसानों ने प्याज का निर्यात कर दिया। क्योंकि घरेलू प्याज बाजार में आने के बाद उन्हें दाम गिरने की आशंका थी। जिसके कारण आज कल हरियाणा में प्याज का थोक भाव 36 से 40 रुपये प्रति किलो है, फुटकर भाव 35 से 45 रुपये किलो है, जबकि पिछले साल इन दिनों यही प्याज 15 से 20 रुपये किलो बिक रहा था। ये स्थिति तब है जब हरियाणा का प्याज भी घरेलू बाजार में आ चुका है। जिससे आगे भी भाव बढ़ने की संभावना है।
इस बार हरियाणा से प्याज खरीद रहे मध्य प्रदेश के किसान : महाराष्ट्र व मध्यप्रदेश के किसानों से खरीदकर निर्यातकों द्वारा अधिकतर प्याज निर्यात कर दिया।
अक्सर मध्यप्रदेश से प्याज लाया जाता था लेकिन पहली बार देखने को मिल रहा है कि मध्यप्रदेश के किसान अक्तूबर व नवंबर की घरेलू बाजार की मांग को पूरा करने के लिए इन दिनों हरियाणा में प्याज की खरीदारी कर रहे हैं, ताकि उसे स्टॉक करके त्योहारी और शादियों के मौसम में महंगा बेचकर मुनाफा कमा सकें।
लहसुन भी दोगुने भाव में बिक रहा
सब्जी एवं फल आढ़ती एसोसिएशन के पूर्व प्रधान किशन सचदेवा ने बताया कि पिछले साल लहसुन भी कम था। यही कारण रहा कि मध्यप्रदेश में जनवरी व फरवरी के महीने में लहसुन 300-400 रुपये प्रति किलो तक बिका। मार्च के अंत में हरियाणा, पंजाब व हिमाचल प्रदेश में 80 से 120 रुपये प्रति किलो तक लहसुन पहुंच गया था। लहसुन का थोक भाव आज भी 90 से 130 रुपये और फुटकर भाव 120 से 160 रुपये प्रति किलो है। जो इन दिनों पिछले साल की अपेक्षा दोगुना भाव है।