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सत्संग से होता है प्रभु का मिलन : जयंती भारती

Sat, 18 May 2024 06:24 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
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संवाद न्यूज एजेंसी
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करनाल। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान द्वारा हुड्डा मैदान सेक्टर 13 चल रही श्रीराम कथा में व्यास साध्वी जयंती भारती ने बताया कि श्रीराम का श्री जानकी से प्रथम मिलन पुष्प वाटिका में होता है। यहीं से शुरू होता है जानकी जी का आदर्श चरित्र। यह पुष्प वाटिका क्या है, संत समाज का प्रतीक है। जब हमारे जीवन में सत्संग का आगमन होता है तब हमारा मिलन प्रभु की भक्ति से होता है।

उन्होंने बताया कि सत्संग दो शब्दों के सुमेल से बना है सत व संग, सत का भाव ईश्वर एवं संग का भाव मिलाप अर्थात जब तक हम ईश्वर से नहीं मिल पाते, उसका साक्षात्कार नहीं कर लेते तब तक जीवन में सत्संग नहीं हो सकता। क्योंकि सत्संग मात्र बातें या चर्चा का विषय नहीं वरन संपूर्ण व्यवहारिकता है।
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हमारे जीवन में वास्तविक सत्संग तब घटित होगा जब हम उस एक अर्थात ईश्वर को जान लेगें। परंतु अब यह प्रश्न उठता है कि ईश्वर से कौन मिलाएगा, मात्र गुरू, क्योंकि वो ही है जो हमारे तम को तिरोहित कर हमारे घट में ईश्वर का अपरोक्ष अनुभव करवा सकता है। प्रभु श्रीराम जब स्वयंवर सभा में पहुंचे तो महाराज जनक की शर्त के अनुसार प्रभु ने धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाई औैर उसे भंग कर दिया। यह लीला भी हमें संदेश दे रही है।
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धनुष प्रतीक है अंहकार का। जब तक आप के अंत्य करण में अहंकार के मेघ हैं, तब तक प्रभु रूपी राम और आत्मा रूपी सीता का मिलन सम्भव हो ही नहीं सकता। भारती ने बताया कि प्रभु श्रीराम व जानकी जी का स्वयंवर पूर्ण होने के पश्चात महाराज जनक जी कहते हैं कि आज मैं कृतक हो गया। कृतक का भाव है कि अब मेरे जीवन मैं कुछ भी पाना शेष नहीं रह गया। इस अवसर पर सोनू कत्याल कत्याल, हैप्पी मदान, राकेश आनंद, अनिल गुलाटी, शेर सिंह लक्खा, अशोक शर्मा प्रधान सारस्वत ब्राह्मण सभा व योगेश भुगड़ा प्रधान पटेल मार्केट आदि मौजूद रहे।
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