- डेढ़ दशक पहले के कम लिंगानुपात का भी दिख रहा असर, नए मतदाताओं में एक ट्रांसजेंडर भी
गगन तलवार
करनाल। गांवों में सजने वाली चुनावी पंचायतों में इबके ताऊ कम नजर आएंगे, जबकि साझा चूल्हा माने जाने वाले तंदूर की आंच पर रोटियां सेकते और गली-गोहांड में होने वाली गपशप में ताई चुनावी तड़का लगाएंगी। वहीं पहली बार वोट डालने वालों में काच्चे घाबरू देश की बड़ी पंचायत का नुमाइंदा चुनने में छोरियों से ज्यादा बड़ी भूमिका में नजर आएंगे।
क्योंकि 2019 के चुनाव के मुकाबले इस बार होने वाले लोकसभा चुनाव में 85 वर्ष से अधिक आयु के मतदाताओं की संख्या घटी है। कम हुई इस संख्या में पुरुषों की संख्या महिलाओं की तुलना में करीब 60 प्रतिशत तक ही है। इसी तरह नई वोट बनवाने वालों में 18 से 19 वर्ष आयु के मतदाताओं में लड़कों की संख्या लड़कियों से दो गुना तक है। ऐसे में युवा पीढ़ी में सांसद चुनने में लड़के आगे रहेंगे। इसका एक कारण करीब डेढ़ दशक पहले कम रहा लिंगानुपात भी माना जा रहा है।
आंकड़ों पर नजर डालें तो करनाल जिले की पांच विधानसभा क्षेत्रों में 18 से 19 वर्ष आयु के कुल 23346 मतदाता हैं, इनमें लड़कों की संख्या 15625 है और लड़कियां महज 7720 हैं। इसके अलावा एक ट्रांसजेंडर भी है। इसी तरह 85 वर्ष से अधिक आयु की श्रेणी में 17165 बुजुर्ग मतदाता हैं, इनमें 10214 महिलाएं और 6951 पुरुष हैं।
पांच साल में 29290 बुजुर्गों का कटा नाम
2019 के मुकाबले 2024 की मतदाता सूची से 29290 बुजुर्गों का नाम कटा है, इनकी मौत हो चुकी है। आंकड़ों के अनुसार मरने वालों में पुरुषों की संख्या ज्यादा है। इधर, फरवरी माह तक 87919 नई वोट भी बनाई गई। इनमें 23346 वोट 18 से 19 वर्ष आयु वर्ग की हैं। जबकि करीब 30 हजार वोट शादी होने के बाद लड़कियों की वोट जिले में ट्रांसफर हुई है।
इस आयु वर्ग के इतने मतदाता
मतदाता
पुरुष
महिला
कुल
युवा
15625
7720
23346
बुजुर्ग
6951
10214
17165
दिव्यांग
6787
3835
10622
(युवा 18 से 19 वर्ष और बुजुर्ग 85 वर्ष से अधिक की आयु के हैं)
मौत होने पर इतनी वोट कटी
खंड
वोट
नीलोखेड़ी
7341
इंद्री
4302
करनाल
2145
घरौंडा
6695
असंध
8807
कुल
29290