करनाल। बच्चों में बढ़ रही मोबाइल पर रील आदि देखने व गेम खेलने की आदत छुड़वाने के प्रयास शुरू हो गए हैं। सीबीएसई ने इस पर पहल करते हुए बच्चों को नॉन अकादमिक किताबें पढ़वाने के निर्देश जारी किए हैं। डिजिटल प्लेटफार्म पर मिलने वाली इन किताबों को बच्चों ने कितनी देर और क्या पढ़ा, इसकी भी निगरानी होगी।
इसके लिए फरवरी में लॉन्च हुए राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय एप की मदद ली जाएगी। जिसको बच्चों तक पहुंचाने के लिए बोर्ड की ओर से जल्द ओरिएंटेशन कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा। जिसमें स्कूल की ओर से नियुक्त किए गए एक शिक्षक को ऑनलाइन या ऑफलाइन प्रशिक्षण दिया जाएगा। ताकि बताया जा सके कि यह एप कैसे बच्चों के लिए फायदा देगा।
खास बात यह है कि इस एप पर बच्चा कितना समय रहा, इसकी ट्रैकिंग भी होगी और उसी आधार पर उसे रिवॉर्ड प्वाइंट भी दिए जाएंगे। इसी को लेकर सीबीएसई ने सर्कुलर भी जारी कर दिया है। जारी पत्र में कहा गया है कि इसके लिए अपने स्कूल का एक नोडल अफसर तैनात किया जाए। इस नोडल अफसर को ऑनलाइन या फिर ऑफलाइन इस एप के बारे में जानकारी दें। इसके बाद नोडल अफसर स्कूल में बच्चों को इसके बारे में जानकारी देगा। ताकि अधिक से अधिक बच्चे राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय के बारे में जानें और इस पर दी गई किताबों को पढ़ें। ब्यूरो
इसलिए लिया निर्णय
शिक्षा इन दिनों ऑनलाइन प्लेटफार्म पर है। कोरोना काल में लगभग हर बच्चे के हाथ में मोबाइल फोन आ गया और वह इसी के माध्यम से पढ़ने भी लगा। यह सुविधा आज भी जारी है और बच्चों को मोबाइल पर ही ग्रुप बनाकर पढ़ाया जा रहा है। जबकि स्कूलों द्वारा दिशा निर्देश भी दिए जाते हैं। स्थिति यह है कि अब अधिकतर कार्य मोबाइल पर ऑनलाइन ही होने लगे हैं। लेकिन इसका गलत इस्तेमाल भी हो रहा है। बच्चे मोबाइल पर रील आदि देखने में समय बिता रहे हैं, जबकि कई तो इस पर गेम खेलने के भी आदी हो चुके हैं। इसी को बदलने के लिए यह कदम उठाया है।
आयुवर्ग के हिसाब से हैं किताबें
राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय को इसी साल फरवरी में लॉन्च किया गया था। यह सुविधा शिक्षा मंत्रालय द्वारा दी गई। इस एप में तीन से आठ, नौ से 11, 12 से 14 व 11 से 18 आयु वर्ग के लिए पुस्तकें दी गई हैं। यह सारी नॉन अकादमिक यानी पाठ्यक्रम से हटकर हैं। इसमें आयु वर्ग के हिसाब से कहानियां, आटोबायोग्राफी, साइंस फिक्शन, नावेल आदि अपलोड किए गए हैं। जो बच्चे इस प्लेटफार्म पर आएंगे वे आगे चलकर रिडर्स क्लब का भी हिस्सा बनेंगे। इससे वे आने वाली प्रतियोगिताओं में भी हिस्सा ले सकेगा।