- पिछले सालों में 49.18 प्रतिशत रेहड़ी संचालकों, फुटपाथ विक्रेताओं ने लिया लोन
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। कोरोना काल में अपना कारोबार गंवाने वाले रेहड़ी, फड़ी संचालकों और फुटपाथ विक्रेताओं को केंद्र सरकार ने एक और मौका दिया है। जो रेहड़ी संचालक या फुटपाथ विक्रेता प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर आत्मनिर्भर निधि (पीएम स्वनिधि) के तहत पिछले सालों में ऋण नहीं ले सके हैं, वह अब ऋण लेने के लिए नगर निगम के नेहरू पैलेस स्थित कार्यालय में आकर फार्म भर सकते हैं।
या अपने नजदीकी अटल सेवा केंद्र से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। पिछले सालों में कुल फुटपाथ विक्रेताओं, रेहड़ी फड़ी संचालकों में से सिर्फ 19.18 प्रतिशत ने ही 10 हजार रुपये का ऋण लिया है। निगमायुक्त अभिषेक मीणा ने बताया कि पीएम स्वनिधि योजना वर्ष 2020 में कोविड के बाद शुरू हुई थी। जिन रेहड़ी-फड़ी संचालकों, फुटपाथ विक्रेताओं का कारोबार चौपट हो गया था। ऐसे लोगों की आर्थिक मदद करके उनके व्यवसाय को फिर से शुरू कराकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए ये योजना शुरू की गई थी। जिसमें बिना गारंटी के 10 हजार रुपये का ऋण दिया जाता था। जो लोग मासिक किस्तों में इस ऋण को चुका देते हैं, वह संबंधित बैंक से ही 20 हजार रुपये का ऋण ले सकते हैं। इसे चुकाने के बाद 50 हजार रुपये ऋण भी दिया जाता है।
खास बात ये है कि इस ऋण पर लगने वाले ब्याज में से लाभार्थी को नौ प्रतिशत की सब्सिडी मिलती है, शेष एक या दो प्रतिशत ही लाभार्थी को चुकाना पड़ता है। निगमायुक्त ने बताया कि स्ट्रीट वैंडर निगम कार्यालय में फार्म भरने के बाद भी अटल सेवा केंद्र में जा सकते हैं। आवेदन के लिए लाभार्थी को फोटो, आधार कार्ड और बैंक कॉपी की फोटो प्रति देनी होगी। फार्म भरने के बाद स्ट्रीट वैंडर का सत्यापन होता है और फिर उसे ब्रिकी प्रमाणपत्र जारी कर दिया जाता है।
पथ विक्रेता, रेहड़ी संचालकों को नए लाइसेंस होंगे जारी
प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर आत्मनिर्भर निधि योजना के तहत नगर निगम ने पथ विक्रेता/रेहड़ी-फड़ी वालों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए नए लाइसेंस जारी करने का काम शुरू कर दिया है। नए लाइसेंस के बारे में जानकारी लेना हो या योजना के तहत आवेदन करने की प्रक्रिया जाननी हो, तो कोई भी नेहरू पैलेस स्थित निगम कार्यालय (ओल्ड इंप्रूवमेंट ट्रस्ट) में आ सकता है, निगम ने एक हेल्प डेस्क भी स्थापित की है।
डिजिटल लेनदेन पर मिलेगा कैशबैक
जो स्ट्रीट वेंडर डिजिटल तरीके से पैसे का लेन-देन करेगा, उसे कैश बैक का लाभ मिलता है। उदाहरण के तौर पर जो वेंडर साल में 100 डिजिटल ट्रांजेक्शन करेगा, उसे कम से कम 100 रुपये मासिक कैश बैक का लाभ मिलेगा।
कितने लोगों ने लिया ऋण
करनाल शहर में अब तक कुल 5455 स्ट्रीट वेंडरों की पहचान की गई है। इसमें से अब तक 49.18 प्रतिशत यानी 2683 को 10 हजार रुपये का, 1217 को 20 हजार रुपये, 177 को 50 हजार रुपये का ऋण विभिन्न बैंकों से दिया जा चुका है।