करनाल। हरियाणा को स्वतंत्र अस्तित्व में आए 55 साल हो गए हैं, राज्य की ऐतिहासिक एवं धार्मिक नगरी करनाल की विकास यात्रा भी तेजी के साथ आगे बढ़ी है। कदम दर कदम ढांचागत विकास से लेकर शहर को फूलों का शहर बनाने के प्रयासों तक स्मार्ट प्रयास किए गए हैं। शहर विधायक एवं हरियाणा के मौजूदा मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने करनाल स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट देकर प्रगति के आसमान पर परवाज दी है। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत अब तक करीब 350 करोड़ रुपये व्यय किए जा चुके हैं, करीब पांच सौ करोड़ रुपये के विकास कार्य चल रहे हैं, कुछ शुरू होने की तैयारी में हैं। वहीं, हरियाणा सरकार ने भी शहर को कई बड़े प्रोजेक्ट दिए हैं। जिसमें करीब 230 करोड़ रुपये की अमृत योजना के तहत सीवरेज, ड्रेनेज व्यवस्था को दुरुस्त करने के कार्य उल्लेखनीय हैं। हरियाणा का चावल का कटोरा कहलाने वाले शहर ने औद्योगिक विकास के पायदान पर भी कदम आगे बढाए हैं।
पांच सौ करोड़ की विकास परियोजनाएं होंगी शुरू
हरियाणा नर्सिंग होम से खालसा कॉलेज फ्लाईओवर, सेक्टर-32 में एचएसवीपी ग्राउंड पर इंडोर स्वीमिंग पूल, जिला नागरिक चिकित्सालय भवन, हाउसिंग फॉर अर्बन पूअर, पुरानी अनाज मंडी में कॉमर्शियल स्पेश निर्माण, कमेटी चौक स्थित ओल्ड एमसी भवन निर्माण के साथ-साथ स्कॉडा के तहत शहर की पेयजल व्यवस्था को स्वचालित बनाने सहित करीब पांच सौ करोड़ रुपये के कई प्रोजेक्ट हैं, इनमें कुछ पर कार्य शुरू हो चुका है तो कुछ पर कार्य शुरू किया जाना है। कुछ प्रोजेक्ट के टेंडर लगा दिए गए हैं।
साढ़े तीन सौ करोड़ के विकास कार्य पूरे
152 करोड़ की लागत से मिश्रित कमान एवं नियंत्रण केंद्र (आईसीसीसी) से शहर की यातायात व्यवस्था को स्मार्ट किया गया है। अमृत योजना के तहत सीवरेज व ड्रेनेज का 93 करोड़ रुपये का कार्य पूरा हो चुका है। फूसगढ़ की 63 सड़कों सहित शहर के कई प्रमुख मार्गों का करोड़ों रुपये से कायाकल्प किया गया है। सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए सुपर सकर मशीनों, 70 टिप्परों सहित कई मशीनें दी गई हैं। खेल की दिशा में भी कर्ण स्टेडियम में 39 करोड़ रुपये से होस्टल, ब्लॉक, लॉन टेनिस आदि बना तो इंडोर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स सेक्टर-32 में हर मौसम के लिए ओलंपिक साइज इंडोर स्वीमिंग पुल का निर्माण कराया जा रहा है। शिक्षा के डिजिटलीकरण के लिए नौ स्कूलों में स्मार्ट क्लासें तैयार की गई। इसके अलावा कई विकास कार्य नगरनिगम द्वारा हरियाणा सरकार की सहायता से कराए हैं।
कर्णनगरी में बने आठ प्रवेश द्वार
श्रीमद्भागवत गीता द्वार, दानवीर कर्ण द्वार, पंडित दीनदयाल उपाध्याय द्वार, श्री घंटाकर्ण महावीर मनोहर द्वार, कल्पना चावला द्वार, मां सरस्वती द्वार को पूरा कर लिया गया है। स्वामी विवेकानंद द्वार व श्री गुरुनानक देव द्वार पर अभी कार्य किया जा रहा है। इन पर करीब चार करोड़ रुपये की लागत आई है।
पर्यावरण को मिला बढ़ावा
पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए भी कई प्रयास किए गए हैं। इसके लिए पश्चिमी यमुना कैनाल फ्रंट का विकास दो फेज पूरे हो चुके हैं, तीसरे फेज का कार्य चल रहा है। इसी में छठ घाट का निर्माण भी किया गया है। करोड़ों की लागत से तीन फेज में कर्ण लेक की सुंदरता पर भी बढ़ाया गया है। 110 फीट ऊंचा फ्लैग मास्ट लगाया तो गांधी चौक पर एफआरपी दांडी मार्च प्रतिमाओं के साथ पार्क का विकास, गांधी मेमोरियल हॉल, अंडर फ्लाईओवर का सुंदरीकरण, कैंटोनमेंट चर्च टावर, मधुबन, मीनार रोड एवं सेक्टर-4 में कोसमीनार, अटल पार्क, गप्पू वाला पार्क सहित विभिन्न पार्कों का सुंदरीकरण किया गया है।