- दिल्ली में आयोजित खेलो इंडिया पैरा गेम्स में गुजरात की पारूल को दी शिकस्त
मुकेश राणा
करनाल। नीरज देवी ने खेलो इंडिया पैरा गेम्स में हरियाणा को बैडमिंटन में स्वर्ण पदक दिलाया है। मूलरूप से सोनीपत के सरमाना गांव की रहने वाली दिव्यांग नीरज ने 37 वर्ष की उम्र में हरियाणा की झोली में पहली बार आयोजित किए जा रहे खेलो इंडिया गेम्स में बैडमिंटन का स्वर्ण पदक डाला है।
मंगलवार को बैडमिंटन में उनका मुकाबला गुजरात की पारूल के साथ हुआ। जिसमें नीरज ने पारूल को 19-21, 21-19, 21-14 से मात दी। सेमीफाइनल में नीरज ने झारखंड की संजना को 17-21, 21-10, 21-13 से हराकर जगह बनाई थी। मौजूदा समय में नीरज करनाल में रहकर बी-24 बैडमिंटन अकादमी में प्रशिक्षण ले रही है। विदित हो कि प्रथम खेलो इंडिया पैरा गेम्स का आयोजन केडी जाधव इंडोर स्टेडियम दिल्ली में किया जा रहा है। जिसका उद्घाटन केंद्रीय खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने किया। देशभर से इस प्रतियोगिता में 1400 दिव्यांग खिलाड़ी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं।
नीरज ने बताया कि उनके पति सुभाष शिक्षा विभाग में कार्यरत हैं। जिनका कुछ समय पहले ही करनाल में ट्रांसफर हुआ है। नीरज अब तक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर चुकी है। बी-24 अकादमी के संचालक नरेंद्र कुकरेजा ने नीरज की जीत पर खुशी जाहिर की। अकादमी पहुंचने पर नीरज देवी का स्वागत किया जाएगा।
दो साल पहले किया खेल शुरू
नीरज ने करीब दो साल पहले ही बैडमिंटन खेलना शुरू किया था। उनके पड़ोस से एक लड़की पूजा शूटिंग के लिए जाती थी। एक दिन उनकी मुलाकात बैडमिंटन कोच प्रदीप पालीवाल से हुई। जिन्होंने नीरज को बैडमिंटन खेलने की सलाह दी। पालीवाल ने राह दिखाई तो शुरुआत में प्रशिक्षक अशीष राठी ने उनकी प्रतिभा को तराशा। मौजूदा समय में करनाल की बी-24 में कोच शिवम उनकी प्रतिभा को निखार रहे हैं।
दो साल की मेहनत से जीते कई पदक
नीरज ने 2021 में रैकेट को अपने हाथों में थामा। छह महीने की कड़ी मेहनत के दम पर उन्होंने उड़ीसा में आयोजित नेशनल प्रतियोगिता में क्वार्टर फाइनल तक का सफर तय किया। 2022 में इंडोनेशया ओपन के सिंगल और मिक्स डबल में कांस्य पदक जीता। स्पेन में कांस्य जीता और बहरीन और ऑस्ट्रेलिया में भी अपनी प्रतिभा का बेहर प्रदर्शन किया। इसके अलावा मार्च 2023 को लखनऊ में आयोजित नेशनल प्रतियोगिता में पदक जीता।
दिव्यांगता को दी मात
नीरज देवी फरमाणा गांव की बेटी है। उनकी शादी 2011 में सरमाना के सुभाष के साथ हुई। 10 साल तक गृहस्थी में रही। दिव्यांग होने के बावजूद हमेशा कुछ नया करने की साेचती रहती थी। पति सुभाष ने भी नीरज की हर संभव मदद की। अपने बच्चों नौ साल की उन्नति व छह साल की हिमानी की परवरिश भी नीरज बेहतर तरीके से कर रही है।