एनडीआरआई के अकाउंट्स ब्रांच से करीब डेढ़ करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने का मामला प्रकाश में आया है। एनडीआरआई में कार्यरत कर्मचारियों ने ही अपने निजी खातों में पैसा ट्रांसफर किया हुआ है। यह पैसा रिसर्च के बजट का था या कर्मचारियों के वेतन का यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।
एनडीआरआई जैसे बड़े संस्थान में इस तरह के पैसों में हेराफेरी के बाद संबंधित अधिकारियों की गंभीर लापरवाही सामने आई है। एनडीआरआई की डॉ. स्मिता सिरोही की शिकायत पर सिविल लाइन थाना पुलिस ने पांच आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी सहित विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी हैं। एनडीआरआई में उजागर हुए इस मामले से हड़कंप मचा हुआ है।
सिविल लाइन थाना के प्रभारी प्रतीक कुमार ने बताया कि एनडीआरआई में कार्यरत आरोपी दीपक कुमार वासी एनडीआरआई कैंपस, सुखविंद्र सिंह वासी गांधी नगर, मनप्रीत कौर वासी नवांशहर पंजाब, विक्रम वासी गांधी नगर और मॉडल टाउन के अमरेंद्रा श्रीवास्तव के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 120 बी, 409, 468 समेत अन्य धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। जिन खातों में पैसे डाले गए हैैं उन खातों की जांच की जा रही है। जांच के बाद ही आरोपियों की गिरफ्तारी की जाएगी। शिकायतकर्ता डॉ. स्मिता सिरोही एनडीआरआई में ही कार्यरत हैं।
खातों में गये रुपयों का ब्यौरा
शिकायतकर्ता स्मिता सिरोही ने पुलिस को जो शिकायत दी है उसके मुताबिक आरोपियों के खाते में पैसा जमा हुआ है। आरोपी गांधी नगर के सुखविंद्र सिंह के अकाउंट में करीब 33 लाख रुपये, मनप्रीत कौर के खाते में करीब 37 लाख, विक्रम के खाते में करीब 45 लाख, अमरेंद्रा श्रीवास्तव के खाते में करीब 8 लाख तथा दीपक कुमार के खाते में करीब एक लाख रुपये की राशि ट्रांसफर की गई है। पुलिस का कहना है कि शिकायतकर्ता ने जिस राशि का उल्लेख किया है उसे पक्का नहीं माना जा सकता। जांच के बाद ही स्थिति साफ होगी।
आरोपियों के खातों की होगी जांच
थाना प्रभारी प्रतीक कुमार ने बताया कि आरोपियों ने पूरी चालाकी के साथ रुपये का हेरफेर किया है। आरोपियों के बैंक खातों की डिटेल की जांच की जाएगी। एनडीआरआई के अकाउंट ब्रांच से इन आरोपियों के खाते में इतनी बड़ी राशि कैसे ट्रांसफर हुई हर पहलु पर मामले की जांच पड़ताल की जाएगी। पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक एक आरोपी दीपक कुमार कैंपस में ही अधिकारी के तौर पर कार्यरत है। सुखविंद्र सिंह और अमरेंद्रा श्रीवास्तव आरओ के पद पर तैनात हैं। बाकी कर्मचारी भी एनडीआरआई में तैनात हैं।
वर्जन
निजी खातों में रुपये गए हैं। पुलिस को शिकायत कर दी है। प्रत्येक मामले की मीडिया को पूरी जानकारी नहीं दी जा सकती।
- डॉ. स्मिता सिरोही, शिकायकर्ता