नगर निगम ने लिया निर्णय, सड़कों पर घूम रहे बेसहारा पशुओं से मिलेगी निजात
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। बेसहारा पशुओं की समस्या जटिल है। अमर उजाला के अभियान के बाद लोगों ने समाधान भी बताए हैं। सरकार ने नगर निगम को शहर को बेसहारा पशुओं से मुक्त करने की जिम्मेदारी भी सौंपी है। ऐसे में नगर निगम ने इसके लिए प्रयास भी शुरू कर दिए हैं। इसके तहत नगर निगम ने अपनी फूसगढ़ स्थित नंदी गोशाला का विस्तारीकरण करने का निर्णय लिया है, जिस पर कार्य शुरू कर दिया गया है। कुछ संस्थाएं भी बेसहारा पशुओं से दुर्घटनाएं रोकने के लिए आगे आई हैं।
नगर निगम की शहर में एक मात्र नंदी गोशाला फूसगढ़ ही है जो पहले से ही फुल है। गोशाला के सुपरवाइजर सोनू ने बताया कि इन दिनों गोशाला में 450 नंदी और 900 गाय यानी 1350 गोवंश हैं, जबकि इसकी क्षमता 1000 पशुओं की है। इसके बावजूद शहरों की सड़कों पर करीब डेढ़ से दो हजार पशु बेसहारा घूम रहे हैं।
समस्या जटिल है कि इतने पशुओं को कहां रखा जाए। पिछले दिनों निगम की गोशाला से करीब 156 पशुओं को निसिंग गोशाला भिजवाया गया है, जिससे यहां कुछ और पशुओं को सड़कों से पकड़कर लाया जा सके लेकिन इससे बात बनती नहीं दिख रही है। ऐसे में निगम ने अपनी गोशाला के विस्तारीकरण का निर्णय लिया है। इसके साथ ही गोशाला को खाली करने के लिए पशुओं को ग्रामीण क्षेत्रों की गोशालाओं में पशु भेजने की प्रक्रिया भी चल रही है। कस्बों व गांवों की गोशालाओं से संपर्क साधा जा रहा है। उप निगमायुक्त अशोक कुमार ने बताया कि असंध की गोशाला के प्रबंधक से भी बातचीत की जा रही है। ताकि यहां से और पशुओं को वहां भेजा जा सके।
जिले में हैं 16 गोशालाएं
करनाल शहर में नंदी गोशाला फूसगढ़, श्रीकृष्ण गोशाला व श्रीराधा कृष्ण गोशाला आदि तीन गोशालाएं हैं। तीनों गोशालाओं की क्षमता 2000 पशुओं के रखने की ही है। जिलेभर में करीब 16 गोशालाएं हैं, जिसमें जुंडला, निसिंग, उपलाना, घरौंडा, बरसत, मुनक, कुंजपुरा, तरावड़ी, सीतामाई, गोंदर आदि की गोशालाएं शामिल हैं। जिनमें प्रत्येक की क्षमता 500 से 1200 पशुओं तक की है।
पशुओं को पकड़ने का अभियान चल रहा है
नगर निगम की गोशाला में भले ही क्षमता से अधिक पशु हैं लेकिन वहां पर बेहतर व्यवस्थाएं की जा रही हैं। 12 गोसेवक लगातार गायों की सेवा में लगे हैं। चारा, चिकित्सा आदि की भी अच्छी सुविधा है। इसी गोशाला के पास ही दो एकड़ जमीन है, जिस पर अनधिकृत कब्जा किया गया है। शीघ्र ही निगम इस भूमि को कब्जामुक्त करा यहां टीनशेड आदि की व्यवस्था करके गोशाला का विस्तारीकरण करेगा। जिससे यहां और अधिक पशुओं को रखा जा सकेगा। आसपास की ऐसी गोशाला संचालकों से भी बातचीत की जा रही है, जहां गोवंश की संख्या क्षमता से कम है। वहां भी करनाल से पशु भेजे जाएंगे। नगर में बेसहारा पशुओं को पकड़ने का अभियान चल रहा है।
- अशोक कुमार, उप निगमायुक्त करनाल