करनाल। कर्ण नगरी के बॉक्सर निशांत देव ने ओलंपिक के पहले मुकाबले में प्रतिद्वंद्वी को 3-2 से शिकस्त देकर क्वार्टर फाइनल में प्रवेश कर लिया है।
मुकाबले के दौरान निशांत ने पहले राउंड में 1-0 से बढ़त बनाकर रखी। उसके बाद दूसरे राउंड में पंचों की बौछार करते हुए अपनी बढ़त बरकरार रखी। तीसरे व अंतिम राउंड में उसने प्रतिद्वंद्वी को 3-2 से हरा दिया।
पहला मुकाबला भारतीय समय अनुसार 12.34 बजे इक्वाडोर के मुक्केबाज जोसे टेनोरियो के साथ हुआ। निशांत का अगला मैच तीन अगस्त को होगा। उसने टॉप 16 में जगह बना ली है।
प्रतियोगिता जीतने के बाद निशांत के परिजन खुशी से झूम उठे। निशांत देव करनाल से प्रथम वर्ल्ड ओलंपिक क्वालीफाई में 71 किलोग्राम भार वर्ग का एकमात्र खिलाड़ी है। उसने दक्षिणी यूरोप के मोंटेनीग्रो देश में आयोजित शिविर में मुक्केबाजी की बारीकियां सीखी हैं। निशांत देव के अनुसार उसका लक्ष्य ओलंपिक में पदक जीतना है।
पिता पवन देव ने बताया कि निशांत ने इस बार ओलंपिक क्वालीफाई करने के लिए कड़ी मेहनत की है। वह उन सभी मुक्केबाज को पहले ही हरा चुका है जिनसे उसका मुकाबला है।
मामा से मिली प्रेरणा : निशांत की मां प्रियंका देवी ने बताया कि उसने बचपन में अपने मामा का पोस्टर देखकर बॉक्सर बनने की ठान ली थी। जब वह आठ साल का था तो उसके मामा बॉक्सर मनोज ने कॉमनवेल्थ में स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया था। उन्होंने बताया कि उसके दादा कृष्ण देव व दादी रोशनी देवी निशांत को रोज सुबह अभ्यास के लिए चार बजे जगा देते थे।
कर्ण नगरी के बॉक्सर निशांत देव ने पेरिस ओलंपिक के लिए क्वालीफाई 71 किलोग्राम भार वर्ग के मुकाबले में मोल्दोवा के मुक्केबाज वासिले सेवोटरी को 5-0 से हराकर किया था। यह मुकाबला जीत कर वह देश के एकमात्र पुरुष मुक्केबाज बन गए थे, जिन्होंने ओलंपिक की टिकट पक्की की। पेरिस जाने से पहले निशांत देव ने बातचीत के दौरान बताया था कि इस बार ओलंपिक में देश के लिए स्वर्ण पदक लाना मुख्य लक्ष्य रहेगा। इससे पहले वह देश के लिए ओलंपिक में पदक लाने से चूक गए थे।
इस बार उनके पास दूसरा बेहतरीन मौका है, अच्छी बात यह रही कि इस बार उनके कोच सुरेंद्र चौहान व उनके पिता पवन देव भी पेरिस साथ गए हैं। विदित हो की वर्ल्ड चैंपियनशिप के कांस्य पदक विजेता निशांत पिछले क्वालीफायर्स में मामूली अंतर से कोटा हासिल करने से चूक गए थे।
इस कैटेगरी में इस बार पांच कोटे दांव पर लगे थे, भारत ने इस तरह से मुक्केबाजी में ओलंपिक के लिए चौथा कोटा हासिल किया। निशांत से पहले महिला मुक्केबाज निखत जरीन (50 किग्रा), प्रीति पवार ( 54 किग्रा), लवलीना बोरगोहेन (75 किग्रा) ओलंपिक कोटा हासिल कर चुकी थी। संवाद