संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। स्वास्थ्य विभाग को मेडिकल फिटनेस प्रमाणपत्र की फीस को अब सरकारी खजाने में जमा कराना होगा। इतना ही नहीं इसका पूरा लेखा जोखा भी रखना होगा।
इससे पहले इसकी फीस सिविल सर्जन कार्यालय में ही रहती थी।
इसको लेकर स्वास्थ्य महानिदेशक ने प्रदेश के सभी सिविल सर्जन को पत्र जारी कर निर्देश जारी कर दिए है। जिसमें लिखा है कि केंद्र के अधीन आने वाले कर्मियों के मेडिकल फिटनेस प्रमाणपत्र की सरकारी फीस को राजस्व विभाग में जमा कराया जाए और ये आदेश तुरंत प्रभाव से लागू किए जाते हैं। मेडिकल फिटनेस की फीस 500 रुपये है। सीएमओ कार्यालय में महीने में 30 से 40 मेडिकल फिटनेस प्रमाणपत्र बनाए जाते हैं। जिससे करीब 20 हजार की आमदनी होती है।