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Ambala News: हरियाणा-पंजाब के महाबली बैल, खाते हैं बादाम, पीते हैं 15 लीटर दूध, दिखाया दम

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मुलाना ​स्थित मारकंडा नंदी पर बने ट्रैक पर दौड़ते बैल
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रमाकांत अत्रि
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मुलाना। गड़बड़ों के अवसर पर मुलाना स्थित मारकंडा मंदिर पर खेल मेले लगा। इसमें घोड़ों की दौड़, बैलों की दौड़ और कुश्तियों का आयोजन हुआ। मगर बैलों और घोड़ों की दौड़ ने सभी का मन मोह लिया। मारकंडा नदी पर बनाए ट्रैक पर जब ये बैल दौड़े तो हर कोई हैरान था।
सभी के मन में एक ही प्रश्न था कि इतने मजबूत बैल कहां से आ गए। इनका खानपान कैसा होगा। इस पर बाबा मारकंडा के सेवादार उजागर नाथ बताते हैं कि 33 वर्ष पहले उन्होंने मारकंडा मंदिर से बैलों और घोड़ों की दौड़ की परंपरा शुरू की थी। वे खुद एक जमीदार के बेटे हैं। घर पर हमेशा से ही बैल और घोड़े रहे। ऐसे में विशेष लगाव होने के कारण उन्होंने यहां पर भी बैल और घोड़े पाले।
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इसके बाद गड़बड़ों के अवसर पर मुलाना स्थित मारकंडा मंदिर पर खेल मेले का हर साल आयोजन होता है। इसलिए पहले यहां से बैलों की दौड़ शुरू की। अब यहां पर हरियाणा पंजाब के कई बैल दौड़ाने वाली टीमें प्रतिभाग करती हैं। बाबा उजागर नाथ बताते हैं कि उनके पास भी बैल और घोड़े हैं। इस दौड़ में प्रतिभाग करने के लिए जानवरों को बचपन से ही विशेष भोजन दिया जाता है। इन्हें तिलों का तेल, चने, दूध, बादाम, अखरोट और काजू खिलाये जाते हैं।
एक-एक बैल 15 लीटर दूध पीता है। इसके बाद बैल को रोजाना डेढ़ किलोमीटर दौड़ाया जाता है, जिससे कि वे तैयार हो सकें। इस बार उनके बैल चौथे स्थान पर रहे, मगर पंजाब व हरियाणा के विभिन्न जगहों से आए बैलों ने अपना दमखम दिखाया। यही डाइट घोड़ों को दी जाती है।

नदी के रेत पर बनाते हैं 300 मीटर के ट्रैक

बैलों और घोड़ों की दौड़ के लिए विशेष ट्रैक मेले के आयोजन से पहले ही तैयार कर लिया जाता है। यह ट्रैक मारकंडा नदी की तलहटी के पास बनता है। इससे यहां रेट में जानवरों को दौड़ने में आसानी रहती है। इस खेल के आयोजन के लिए वह पर्चे प्रकाशित कराते हैं। इसके लिए अपने आप ही लोग एक-दूसरे को मेल की जानकारी दे देते हैं और प्रतिभाग अपने जानवरों के लेकर प्रतिभाग करने आ जाते हैं।

दौड़ में दिखता है बैलों का तालमेल

यह बैल जब मैदान पर दौड़े तो हर कोई हैरत में पड़ गया। शक्तिशाली बैलों की जोड़ियां और उनके तालमेल की हर जगह चर्चा दिखाई दी। बैल दौड़ में मोहाली से हैप्पी मुड़ियां ने प्रथम स्थान, अंबाला से सुखदेव बलाना दूसरे स्थान पर, पंजाब से घनोआ ग्रुप घडुंआ पर तीसरे स्थान पर रहे। अंबाला से उजागर सिंह रछेड़ी, मोहाली से फौजी मौली, पटियाला से सिंदर ने प्रतिभाग किया। वहीं बैलों की दौड़ व घोड़ों की दौड़ पर प्रथम द्वितीय तृतीय स्थान पाने वाले मालिकों को नगद राशि और स्मृति चिह्न भेंट किया।
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कुश्ती और लड़कों की दौड़ भी हुई

मेले में मंदिर पर विशाल भंडारा भी लगा। खेल मेले के पहले दिन लड़कों की दौड़ हुई। इसमें प्रथम द्वितीय तृतीय स्थान पर आने वाले खिलाड़ियों को नगद इनाम और स्मृति चिह्न भेंट किया। दोपहर को यहां कुश्तियां हुईं, जिसमें नामी पहलवानों ने अपने जौहर दिखाए। इस अवसर पर बाबा मारकंडा के सेवादार उजागर नाथ ने बताया कि मारकंडा मंदिर पर वर्षो से खेल मेले का आयोजन होता आ रहा है। इस मेले को लेकर लोगों में काफी उत्साह रहता है। यहां के प्रसिद्ध खेल मेले को देखने के लिए हरियाणा ही नहीं, बल्कि पंजाब प्रांत के लोग भी यहां आते हैं ।

मुलाना स्थित मारकंडा नंदी पर बने ट्रैक पर दौड़ते बैल

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