करनाल। जहां दवा, वहां फार्मासिस्ट अवश्य होना चाहिए लेकिन जिले में स्थिति इसके विपरीत है। जिला नागरिक अस्पताल से लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) व सब-सेंटर स्तर पर फार्मेसी अधिकारियों की भारी कमी है।
इसका असर मौजूदा फार्मेसी अधिकारियों व सरकारी अस्पतालों में इलाज लेने वाले मरीजों पर पड़ रहा है। आंकड़ों पर नजर डालें तो जिले में फार्मेसी अधिकारियों के 78 पद स्वीकृत हैं लेकिन यहां पर महज 33 पदों पर ही फार्मासिस्ट तैनात हैं और 45 पद खाली पड़े हैं।
एसोसिएशन ऑफ गवर्नमेंट फार्मेसी अधिकारी करनाल के जिला प्रधान राजेश सिंगला ने बताया कि जहां दवा, वहां फार्मासिस्ट, कथन का पालन करनाल सहित पूरे प्रदेश में नहीं हो रहा है। प्रदेशभर में सैकड़ों की संख्या में फार्मेसी अधिकारियों के पद खाली पड़े हैं, जो फार्मेसी अधिकारी सरकारी संस्थानों में तैनात हैं, उनसे उनके पद का तो काम लिया ही जा रहा है, वहीं दूसरी ओर उन पर अन्य कामों का अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है। इसके चलते उनका काम प्रभावित हो रहा है। जिससे उनकी सेहत पर भी असर पड़ रहा है।
उन्होंने बताया कि करनाल जिले की बात करें तो यहां पर मुख्य फार्मेसी अधिकारी के दो पद स्वीकृत हैं और दोनों ही इस समय खाली पड़े हैं। इसी प्रकार फार्मेसी अधिकारियों के 76 पद स्वीकृत हैं और उनमें से 33 पद ही भरे हुए हैं और 43 पद खाली पड़े हैं। संवाद
जिले की आधी पीएचसी पर नहीं फार्मासिस्ट
एसोसिएशन की कोषाध्यक्ष ममता त्यागी ने बताया कि जिले में 24 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) मौजूद हैं। इनमें से आधी पीएचसी पर तो फार्मेसी अधिकारियों के पद खाली पड़े हुए हैं। इनमें नर्सिंग स्टाफ सहित अन्य कर्मचारी फार्मासिस्ट के रूप में काम चला रहे हैं। बिना फार्मा किया हुआ व्यक्ति मरीजों को बेहतर ढंग से दवा वितरित नहीं कर सकता है। ऐसे में मरीजों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए सरकार को फार्मेसी अधिकारियों के पद भरने चाहिए।
सब सेंटर स्तर पर भी तैनात हों फार्मासिस्ट
एसोसिएशन की सचिव राकेश आहुजा ने बताया कि प्रदेश में सरकार ने सब सेंटर स्तर पर फार्मासिस्टों के पद नहीं बनाए हैं। ऐसे में सब सेंटर पर डॉक्टर या नर्सिंग स्टाफ ही मरीजों को दवा मुहैया कराते हैं। अगर सब सेंटर स्तर पर फार्मेसी अधिकारी हों तो मरीजों को बेहतर इलाज मिल सकेगा। उन्होंने बताया कि प्रदेश में फार्मासिस्ट एक्ट का सख्ती से पालन नहीं हो रहा है क्योंकि आजकल फार्मासिस्ट अपनी डिग्रियां किराए पर दे देते हैं और बिना फार्मा किए लोगों से दवा लेने पर स्वास्थ्य ठीक होने की बजाय खराब हो रहा है।