- राष्ट्रीय बागवानी अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (एनएचआरडीएफ ) ने तैयार किया बीजों का किट
देव शर्मा
करनाल। शहर हो या गांव हर घर में थोड़ी बहुत जमीन ऐसी जरूर होती है, जहां कोई न कोई सब्जी उगाई जा सकती है। लेकिन इतनी कम जमीन के लिए थोड़ा सा बीज उपलब्ध नहीं हो पाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए रसायनरहित सब्जियों के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय बागवानी अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (एनएचआरडीएफ) सलारू, करनाल ने एक किचन गार्डन किट तैयार की है। जिसमें 12 सब्जियों के छोटे-छोटे बीज के पैकेट हैं।
एनएचआरडीएफ के उपनिदेशक बीके दुबे ने बताया कि घर में मौजूद थोड़ी सी जमीन पर कोई न कोई सब्जी लगाई जा सकती है। इसके फायदे ये हैं कि इनकी देखभाल आसानी से हो जाती है, वहीं, परिवार को ताजी और रसायनरहित शुद्ध सब्जियां उपलब्ध हो जाती हैं। भले ही ऐसी छोटी-छोटी भूमि को हम गिनती में न लाएं, लेकिन इस भूमि को जोड़कर देखें तो इसकी मात्रा बड़ी हो जाती है। इसमें यदि थोड़ा-थोड़ा भी उत्पादन हो जाता है तो इसकी मात्रा भी अच्छी खासी हो सकती है। लेकिन बीज छोटे पैकेट में उपलब्ध नहीं होते हैं, यदि किसी को पांच या 10 ग्राम बीज चाहिए तो उसे 50, 100 या 250 ग्राम के पैकेट ही लेने पड़ते हैं, यदि कोई छोटी क्यारी में चार या पांच सब्जियां लगाना चाहता है तो महंगा पड़ता है।
किट में मौजूद सब्जियों के बीज
एनएचआरडीएफ की ओर से तैयार की गई किचन गार्डन किट में 12 सब्जियां हैं और पांच से 50 ग्राम तक के पैकेट में बीज हैं। इसमें लोबिया (50 ग्राम), भिंडी (50 ग्राम), ग्वारफली (25 ग्राम), पालक (25 ग्राम), चौलाई (25 ग्राम), प्याज (5 ग्राम), तोरई (10 ग्राम), करेला (10 ग्राम), मिर्च (5 ग्राम), बैंगन (5 ग्राम), टमाटर (5 ग्राम) और सहजन की फली (5 ग्राम) के बीज हैं। जिन्हें खरीफ सीजन के दौरान बोया जा सकता है।
घरों में अनुपयोगी भूमि को उपयोगी बनाने, रसायनरहित ताजा सब्जियां उगाने की दिशा में एनएचआरडीएफ ने किचन गार्डन किट तैयार की है। प्रत्येक किट की कीमत 120 रुपये रखी गई है। किचन गार्डन किट का वितरण शुरू कर दिया है। इन किटों की आपूर्ति हरियाणा सहित कई अन्य राज्यों में भी की जा रही है।
- बीके दुबे, उपनिदेशक एनएचआरडीएफ