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Karnal News: न्यायालय परिसर में बनेगा ''किंडरगार्टन'' और ''पालनाघर''

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- सुनवाई या पेशी के दौरान आने वाले अपराधी-आरोपियों और कर्मचारियों व वकीलों के बच्चे बिताएंगे समय
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- पीडब्ल्यूडी करेगा निर्माण, हॉल के साथ रसोई की भी रहेगी सुविधा, कई खेल गतिविधियां भी होंगी आयोजित



गगन तलवार

करनाल। न्यायालय परिसर में नौकरी करने वाले अधिकारी-कर्मचारी और मामलों की सुनवाई के दौरान आने वाले लोगों को अपने छोटे बच्चों को संभालने की चिंता नहीं रहेगी। उनके लिए न्यायालय परिसर में जिला प्रशासन किंडरगार्टन और पालनाघर की व्यवस्था करने जा रहा है। ताकि पूरे दिन बच्चे यहां पर रहकर समय बिता सकें और अभिभावक अपना कोर्ट से संबंधित कार्य आसानी से निपटा लें।

इस तरह की व्यवस्था वाला करनाल प्रदेश का पहला न्यायालय परिसर होगा। जहां आने वाले अधिकारी कर्मचारी के अतिरिक्त आरोपियों और अपराधियों के परिजनों को भी अपने छोटे बच्चों को संभालने की व्यवस्था रहेगी। दोनों जगह यहां कुछ घंटे बिताने के दौरान ही बच्चे खेल-खेल में कई गतिविधियों के माध्यम ज्ञान अर्जित करेंगे। इसके अलावा बच्चों के रखरखाव, खाने और अन्य जरूरी सुविधाएं भी प्रदान की जाएंगी। कई तरह के झूले और खिलौनों की भी व्यवस्था रहेगी। बच्चों को अच्छा और पौष्टिक खाना मिले, इसके लिए कुक की तैनाती भी की जाएगी। पीडब्ल्यूडी की ओर से न्यायालय परिसर में इन दोनों प्रोजेक्ट पर काम किया जाएगा। इसके लिए निविदा प्रक्रिया शुरू हो गई है। अधिकारियों के अनुसार, निर्माण के दौरान हॉल के अतिरिक्त रसोई, शौचालय और खाने आदि की व्यवस्था रहेगी। नए साल से पहले दोनों प्रोजेक्ट तैयार करने की योजना है।
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यह मिलेगी सुविधा

- किंडरगार्टन : यहां पर केवल केस से संबंधित आने वाले लोगों के बच्चों को रखा जाएगा। ये सुविधा बच्चे को कुछ घंटे ही मिलेगी। यहां खाने और खेल गतिविधियों की व्यवस्था रहेगी।

- पालनाघर : यह केवल कोर्ट के अधिकारी और कर्मचारियों के बच्चों के लिए होगी। ताकि जब वे ड्यूटी पर आएं तो अपने बच्चों को साथ ले आएं, जिन्हें वे पालनाघर में छोड़ सकते हैं। इसके लिए उन्हें अपने घर पर कोई वैकल्पिक व्यवस्था करने की जरूरत नहीं होगी।
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जिला प्रशासन ने न्यायालय परिसर में किंडरगार्टन या प्ले हाउस और पालनाघर बनाने का निर्णय लिया है। यहां छोटे बच्चों को रखा जा सकेगा। कोर्ट कर्मचारियों के अलावा मामलों से जुड़े लोगों को बच्चों को संभालने में काफी अच्छी सुविधा मिलेगी। इस तरह की व्यवस्था पहली बार होने जा रही है।
- ऋषि सचदेवा, एक्सईएन, पीडब्ल्यूडी बीएंडआर
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