माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। राजकीय स्कूलों में कार्यरत जेबीटी पिछले पौने सात साल से तबादले के इंतजार में हैं। पिछले तीन साल से हर बार उनके लिए तबादले की प्रक्रिया शुरू तो होती है लेकिन इसे बीच में ही बंद कर दिया जाता है। ऐसे में शिक्षकों को मनचाहा स्कूल नहीं मिल पाता है। कुछ स्कूलों में तो छात्र-शिक्षक अनुपात भी बिगड़ा है। जिसका असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। इस बार भी अभी तक इनकी ट्रांसफर ड्राइव के लिए कोई आदेश नहीं आया है। ऐसे में राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने 30 अप्रैल को प्रदर्शन करने का एलान किया है।
प्रदेश अध्यक्ष सरदार जगजीत सिंह और महासचिव तरुण सुहाग ने बताया कि सरकार की ड्रीम शिक्षक तबादला पॉलिसी में ये साफ लिखा है कि हर साल शैक्षणिक सत्र समाप्त होने पर शिक्षकों का तबादला ड्राइव चलाकर छात्र-अध्यापक अनुपात सही किया जाएगा। अध्यापकों से उनकी च्वाॅइस ऑनलाइन मांगी जाएगी। लेकिन जेबीटी के मामले में ऐसा कुछ नहीं हुआ। एकमात्र सामान्य तबादला ड्राइव सितंबर 2016 में चला था। उसे भी लगभग पौने सात साल होने को हैं लेकिन दूसरा ड्राइव नहीं चला पाया। पॉलिसी में यह भी प्रावधान है कि कोई भी शिक्षक पांच साल से ज्यादा एक स्कूल में सेवाएं नहीं दे सकता। उनका कहना है कि 30 अप्रैल को करनाल में मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया जाएगा। ब्यूरो
नहीं हुआ शिकायतों का समाधान
सितंबर 2016 के तबादला प्रक्रिया में लगभग 1250 जेबीटी को दूरदराज के स्टेशन आवंटित हो गए थे। मनपसंद स्टेशन आवंटित नहीं हुआ। विभाग ने उस समय सुगम पोर्टल पर इस संबंध में शिकायत भी मांगी थी, लेकिन उनका समाधान नहीं हो पाया। हालांकि तबादला पॉलिसी में लिखा है कि तबादला प्रक्रिया के 15 दिन बाद शिकायतों का समाधान किया जाएगा।
अन्य श्रेणी में हो चुकी हैं पांच-पांच प्रक्रिया
संघ का आरोप है कि अन्य एनीवेयर श्रेणी को छोड़ अन्य श्रेणी के शिक्षकों की पांच-पांच तबादला प्रक्रिया हो चुकी है। इस बार भी तबादला प्रक्रिया को लेकर विभाग की दौड़ धूप चल रही है लेकिन इसमें भी जेबीटी का कहीं जिक्र तक नहीं है।