- जिला कष्ट निवारण समिति की बैठक में शहरी स्थानीय निकाय राज्यमंत्री ने 16 मामलों पर की सुनवाई, 11 का मौके पर समाधान
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। मंत्री जी! आपकी सरकार तो अच्छा काम कर रही है, डिपो वाला राशन देने में गड़बड़ी करता है, कभी अंगूठा लगाने की मशीन बंद होने का हवाला देता है तो कभी मनमर्जी के दाम वसूलते हुए राशन देता है। मेरे जैसे कई बीपीएल कार्ड वाले परेशान है..। जैसे ही स्थानीय शहरी निकाय राज्यमंत्री सुभाष सुधा के समक्ष यह मामला आया तो उन्होंने डीएफएससी को फटकार लगाते हुए डिपोधारक का लाइसेंस रद्द करने और उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए।
पंचायत भवन में बुधवार को जिला कष्ट निवारण समिति की मासिक बैठक का आयोजन हुआ। जिसकी अध्यक्षता राज्यमंत्री ने की। उनके समक्ष संगोहा के जसमेर सिंह ने गांव के डिपोधारक हरि सिंह प्रजापत के खिलाफ शिकायत रखी। जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए डीएफएससी ने बताया कि गांव के 11 लोगों ने डिपोधारक के खिलाफ अभद्रता और राशन वितरण में गड़बड़ी के बयान दिए हैं। उन्होंने जून माह में डिपोधारक को कारण बताओ नोटिस दिया था, अभी तक जवाब नहीं आया। इसलिए उसकी सप्लाई बंद कर दी है।
राज्यमंत्री अधिकारी की कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हुए और फटकार लगाते हुए डिपोधारक का लाइसेंस रद्द करने और केस दर्ज कराने के निर्देश दिए। इस दौरान सभागार में उपस्थित गैर सरकारी सदस्यों ने खाद्य आपूर्ति विभाग के अधिकारियों पर मिलीभगत के आरोप भी लगाए। बैठक में एजेंडे में शामिल 16 मामलों पर सुनवाई हुई। इनमें से 11 का मौके पर ही समाधान हुआ और पांच पर जांच के निर्देश दिए। एजेंडे के बाद करीब 150 लोगों की शिकायतों को भी मंत्री ने सुना, जिन पर कार्रवाई के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए।
झूठी निकली शिकायत
कारसा डोड के सरंपच राजकुमार ने गांव में अवैध ठेका खुलने और हुड़दंग की शिकायत दी। इस पर आबकारी विभाग के अधिकारी ने रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए शिकायत को झूठा करार दे दिया। साथ ही शिकायतकर्ता सरपंच पर ठेकेदारों से रुपये लेने का वीडियो भी दिखाया और शिकायत करके दबाव बनाने की आदत भी सिद्ध की। उन्होंने सरपंच के एक पुराने शपथ पत्र को भी मंत्री के समक्ष रख दिया, जिसमें सरपंच ने अपनी शिकायत वापस लेते हुए समझौता किया था। इस पर मंत्री ने शिकायतकर्ता को गलत आरोप लगाने पर फटकार भी लगाई।
लाखों की संपत्ति कैसे नीलम हुई, होगी जांच
सदर बाजार के हेमराज की शिकायत पर एडीसी ने जांच रिपोर्ट पेश करते हुए बताया कि प्रार्थी को 1997 में एचएसवीपी द्वारा प्लाट अलॉट किया गया, जिस पर प्रार्थी ने मकान बनाने के लिए आईसीआईसीआई बैंक से ऋण लिया, जिसकी उसने केवल 50 किश्तें ही अदा की। बैंक ने सारी किश्त जमा न करने के कारण नीलामी के माध्यम से संपत्ति एआईसीआईएल को 2010 में बेच दी। शिकायतकर्ता ऋण अदायगी का कोई प्रमाणपत्र नहीं दिखा पाया। इसलिए मामला दफ्तर दाखिल करते हुए राज्यमंत्री ने एसपी को मामले की जांच के निर्देश दिए।
साधारण मौत सुसाइड बनाने वाले पर हो कार्रवाई
गांव कलेसरा की पूजा शर्मा ने पति की मृत्यु के बाद बैंक से बीमा राशि न मिलने की शिकायत की थी। अग्रणी जिला प्रबंधक ने बताया कि शिकायतकर्ता के खाते में दो लाख रुपये की राशि पहुंच गई। इस पर वे संतुष्ट हुईं। वहीं उपायुक्त उत्तम सिंह ने सवाल उठा दिया कि महिला के पति की साधारण डेथ को बैंक ने सुसाइड कैसे माना, ऐसा करने वाले बैंक अधिकारी पर भी कार्रवाई होनी चाहिए। इस पर मंत्री ने जांच के निर्देश दिए।
मेरे बच्चे जेल में, साइन भी अधिकारियों ने खुद किए
गांव अमुपुर की प्रकाशो देवी ने मनरेगा योजना के लिए किए गए कार्य की पूरी राशि न मिलने की शिकायत की थी। इस पर मंत्री ने प्रकाशो देवी के फिर से बयान दर्ज कर उचित कार्रवाई के निर्देश दिए। प्रकाशो ने बताया कि उनके बच्चे जेल में ही बंद हैं, अभी तक उन्हें नहीं निकाला गया। जब उनकी राशि मिलने के मामले में रिपोर्ट दिखाई और थाना प्रभारी द्वारा बयान लेने की बात आई तो उन्होंने कहा कि इस रिपोर्ट पर तो मैंने साइन ही नहीं किए। इस पर मंत्री नाराज हो गए और अधिकारियों से जवाब तलबी की।
बीमा बैंक ने किया, क्लेम लेने के लिए मुंबई भेज रहे
उचानी की मीना देवी ने पति की मौत के बाद दुर्घटना क्लेम की राशि दो साल से न मिलने की शिकायत की जिसे मंत्री ने काफी गंभीरता से लिया। आरोप लगाया कि बैंक अधिकारी क्लेम देने की बजाय मुंबई की बीमा कंपनी के पास जाने के लिए कहते हैं। अग्रणी जिला प्रबंधक ने बताया कि मामला यूनाईटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी के पास लंबित है। इस पर मंत्री ने कहा कि बैंक अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकता। उन्होंने एसडीएम को भी निर्देश दिए कि कंपनी और बैंक प्रतिनिधि को बुला कर मामला जल्द हल कराएं तथा प्रार्थी को न्याय दिलाएं।
सात माह से सफाई नहीं कराई, गलती बताई तो मिली गाली
गांव बीड बडालवा के गोपाल दास की शिकायत थी कि हाबड़ी ब्रांच नहर निगदू रोड बीड बडालवा के पुल के पास गंदगी का ढेर लगा है जिससे बदबू व बीमारी फैलने का डर लगा रहता है। सात माह से शिकायत लंबित है, समाधान के लिए पूछा तो अधिकारियों से गालियां सुनने को मिली। इस पर बीडीपीओ ने बताया कि यह शिकायत सिंचाई विभाग कैथल से संबंधित है। वाटर सर्विस डिवीजन के कार्यकारी अभियंता की रिपोर्ट के अनुसार कूड़े का ढेर हटवा दिया गया है। मंत्री ने कहा कि ठीक से सफाई करा दें। इस दौरान उपायुक्त उत्तम सिंह ने कहा कि यदि इस तरह का केस दूसरे जिले के संबंधित अधिकारी से संबंद्ध है तो भविष्य में वह भी बैठक में आना सुनिश्चित करें।
2014 से ट्यूबवेल कनेक्शन नहीं मिला
नलीपूर गांव के कश्मीर सिंह को 2014 से ट्यूबवेल कनेक्शन नहीं मिला। अधिकारी की रिपोर्ट के बाद जब और राशि जमा कराने की बात आई तो प्रार्थी बोला जनाब मेरा 50 हजार रुपये देने का ब्योंत नहीं है, कनेक्शन ऐसे ही दिला दो। इस पर विद्युत निगम की ओर से बताया गया कि मामला पॉलिसी से जुड़ा है जिसे निगम मुख्यालय पंचकूला भेजा गया है। अभी यह केस निगम के कानूनी प्रकोष्ठ के पास लंबित है।
आंसू पोंछते हुए बोली, पांच साल हो गए लड़ते हुए...
सेक्टर-9 के विमल किशोर अरोड़ा की शिकायत पर उनकी पत्नी अपने घर से कब्जा हटवाने का मामला लेकर पहुंची। उन्होंने कहा कि 2019 से हुडा अधिकारियों को शिकायत कर रही हैं, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। रोते हुए महिला ने कार्रवाई की गुहार लगाई तो मंत्री ने पड़ोसियों द्वारा घर के गेट के पास से खड़ी गाड़ी हटवाने, गाड़ी चढ़ाने के लिए बनाए गए रैंप को छोड़कर अन्य अवैध रैपों को हटवाने के निर्देश दिए।