करनाल। भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान (आईआईडब्ल्यूबीआर) में बुधवार को भी कई राज्यों के किसानों को बीज वितरण किया गया। इस मौके पर प्राकृतिक खेती विषय पर शुरू की गई दो दिवसीय कृषक-वैज्ञानिक कार्यशाला में लोगों में बढ़ती बीमारियों पर चिंता व्यक्त करते हुए इसके लिए खानपान को दोषी माना गया है। इसमें फसलों में उर्वरकों और खरपतवारनाशकों, कीटनाशकों के अंधाधुंध प्रयोग पर कहा कि हमें सेहत को ठीक रखने के लिए इनसे दूरी बनानी होगी।
कृषि विकास योजना के तहत आयोजित कार्यशाला का शुभारंभ पूर्व सहायक महानिदेशक (कृषि विस्तार) डॉ. रणधीर सिंह ने किया। उन्होंने लोगों में बढ़ती बीमारियों पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि इसके पीछे कहीं न कहीं पेस्टीसाइड व उर्वरकों के अंधाधुंध प्रयोग भी हैं। इन सभी समस्याओं के समाधान के लिए उन्होंने प्राकृतिक खेती को अपनाना आवश्यक हो गया है। आयोजन सचिव डॉ. अनिल खिप्पल ने प्राकृतिक खेती की विभिन्न तकनीकों पर चर्चा की। किसानों ने भी अपने अनुभव साझा किए। किसान अनन्त बहादुर सिंह जो 10 वर्षों से प्राकृतिक खेती कर रहें हैं। उन्होंने अपने अनुभव से किसानों का उत्साह वर्धन किया।
डॉ. सुभाष गिल ने गेहूं व जौ की अधिक पैदावार लेने की विधियां बताईं। डॉ. अमित शर्मा ने विभिन्न क़िस्मों के बारे में बताया। डॉ. सुनील ने गुणवत्ता पर प्रकाश डाला। प्रो. कामिनी कुमारी ने कार्यशाला में प्राकृतिक खेती के सत्र की अध्यक्षता की। संस्थान के कार्यकारी निदेशक डॉ. ओम प्रकाश अहलावत ने कहा कि किसानों में जौं के बीज को लेकर उत्सुकता है। इससे पूर्व विभिन्न राज्यों से आए किसानों को नई किस्मों का उन्नतशील गेहूं व जौं का बीज दिया गया। बीज वितरण का कार्य 24 अक्तूबर को भी जारी रहेगा। इस अवसर पर संस्थान के मीडिया प्रभारी राजेंद्र शर्मा व कई वैज्ञानिक भी उपस्थित रहे।