- डीआर, एआर और प्रबंधक भी भ्रष्टाचार में थे शामिल
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। सहकारिता विभाग में हुए 100 करोड़ के घोटाले में निगदू सहकारी समिति का नाम भी शामिल हो गया है। निगदू सहकारी समिति के प्रबंधक पर पंचकूला के उच्चाधिकारियों के आदेशों की अवहेलना करते हुए अवैध रूप से वर्ष 2020 में तीन कर्मचारियों को प्रति माह 53,370 रुपये के मासिक वेतन पर नियुक्ति देने का आरोप है। जिसकी शिकायत उसी समय उप-रजिस्ट्रार को की गई थी, लेकिन इसमें उप-रजिस्ट्रार, सहायक रजिस्ट्रार व प्रबंधक की सांठगांठ के चलते कोई कार्रवाई नहीं हो पाई।
आरसीएस सहकारी समिति हरियाणा पंचकूला ने वर्ष 2013 में प्रदेशभर के सभी उप-रजिस्ट्रार, सभी सहायक रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां व सभी मुख्य कार्यकारी अधिकारी, केंद्रीय सहकारी बैंक लिमिटेड को नोटिस जारी करते हुए आदेश दिए थे कि वर्ष 2006 के बाद प्राथमिक कृषि सहकारी ऋण समितियां (पैक्स) में यदि कोई कार्यरत कर्मचारी सेवानिवृत होता है तो उसकी जगह कोई नियुक्ति न करने व इसके अतिरिक्त पैक्स में कोई नई भर्ती या नियुक्ति भी न करने बारे हिदायतें दी गई थी और सभी को आदेश दिए गए थे कि सभी कार्यालयों में इस आदेशों की एक-एक प्रति चस्पा करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन उसके बावजूद उप-रजिस्ट्रार रोहित गुप्ता व सहायक रजिस्ट्रार अनु कौशिक ने निगदू पैक्स के प्रबंधक जोगिंद्र सिंह की अनुशंसा पर तीन कर्मचारियों जिनमें सेल्समैन, क्लर्क व सेवादार के पद शामिल हैं, की नियुक्तियां डीसी रेट पर करने की अप्रूवल दे दी। जिसके बाद इसकी शिकायत हुई तो वर्ष 2021 में उप-रजिस्ट्रार ने अपनी कोर्ट लगाई और उक्त नियुक्ति को सही ठहराया, लेकिन इसकी समयावधि को गलत बताया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने इसकी शिकायत उच्चाधिकारी को की। जहां पर 2023 में उच्चाधिकारी ने ही अपने ही पूर्व में दिए गए फैसले को नकारते हुए अपने चेहतों के हित में फैसला सुनाया।
एडीसी की जांच के बाद निगदू पैक्स प्रबंधक पर हुई थी कार्रवाई
इसके बाद जब जांच एडीसी के पास पहुंची और उन्होंने गहनता से जांच की तो निगदू पैक्स प्रबंधक पर अवैध रूप से तीन कर्मियों की नियुक्ति को गलत ठहराया और प्रबंधक को निलंबित करने की सिफारिश की। जिसके बाद पैक्स प्रबंधक को निलंबित किया गया।