करनाल। मनोचिकित्सक डॉक्टर मनीष बठला ने बताया कि इन दिनों अपने घर में कुछ देर कोई भी धार्मिक ग्रंथ पढ़ें।ग्रंथ ही सिखाते हैं कि संयम से सब ठीक हो सकता है। हो सके तो अपने साथ साथ बच्चों को भी इसमें शामिल करें। परिवार के सभी सदस्य मिल कर घर के काम बांट लें। हो सके तो इसमें घर के चलते बच्चों को भी शामिल करें। इससे बच्चों में काम करने की आदत बनेगी। कम बांट कर करने से किसी एक पर वर्कलोड नहीं पड़ेगा और बोरियत भी नहीं होगी। घर में बच्चों के साथ परिवार के सदस्य मिल कर बोर्ड और इनडोर गेम्स खेलें। बच्चों को इस समय चेस खेलना भी सिखाएं। चेस खेलने से दिमाग तेज होता है। कन्सन्ट्रेशन करने की क्षमता बढ़ती है। छोटे बच्चे जल्द ही चीज़ों को याद करने में सक्षम होते हैं। उन्हें अगर बचपन से ही हैल्थ के बेसिक सिखाए जाएं तो उनके उमर भर काम आता है। इस समय बच्चों को। घर में सिखाएं की वे कितनी देर और कैसे हाथ धोएं, खांसते और छींकते समय क्या करें, ज़ुकाम में मास्क लगाने और समय समय पर हाथों को सैनिटाइज करने की आदत डलवाएं। हल्का भोजन करें ताकि पचने में आसानी हो। रोजाना डाइट का 25 % कम करें।