- छोटे अपराध में पानी पिलाने व पौधे लगाने की मिल सकती है सजा
- नए कानून में 33 धाराओं में कारावास, 83 में जुर्माना राशि बढ़ाई
राकेश चौहान
करनाल। नया कानून लागू हो चुका है जिसमें बहुत से बदलाव किए गए हैं। अब हिट एंड रन केस में 10 साल की सजा का प्रावधान कर दिया गया है। यदि इससे बचना है तो घायल को अस्पताल पहुंचाना होगा और हादसे की सूचना भी पुलिस को देनी होगी। यदि कोई चालक ऐसा करता है तो किसी की हादसे में मौत होेने पर वह हिट एंड रन केस से बच सकता है और उसे पांच साल कम सजा होगी।
जिला न्यायवादी डॉ. पंकज सैनी ने बताया कि आईपीसी पुराने कानून की तुलना में नए कानून भारतीय न्याय संहिता 2023 में 33 धाराओं में कारावास की सजा को बढ़ाया गया है, यानी जिन अपराधों में कारावास की सजा तीन साल थी, उसे बढ़ाकर पांच साल तक कर दिया गया है।
वहीं 83 ऐसी धाराएं हैं जिनमें जुर्माना राशि को बढ़ाया गया है। ऐसे ही 23 धाराओं में कम से कम सजा को सुनिश्चित कर दिया गया है। नए कानून में विदेश में बैठकर किसी संगठन व व्यक्ति द्वारा भारत में अपराध कराने पर उसके खिलाफ नए कानून की धारा 48 के तहत उसी अपराध की सजा दी जाएगी, जो उसने कराया है।
इसी तरह अनेकों बदलाव नए कानून में किए गए हैं। बता दें कि वर्ष 1860 में अंग्रेजों ने आईपीसी यानी भारतीय दंड संहिता बनाया था और उसे लागू किया था। जिसमें 511 धाराएं थी। अब इसे बदलकर भारतीय न्याय संहिता-2023 का नाम दिया गया है। जिसमें 358 धाराएं हैं।
इसी प्रकार सीआरपीसी में 484 धाराएं थी, अब इसकी जगह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता ने ले ली है। जिसमें 531 धाराएं हैं। इंडियन एविडेंस एक्ट की जगह लेने वाले भारतीय साक्ष्य अधिनियम में 170 धाराएं हैं जो पहले इंडियन एविडेंस एक्ट में 166 थीं। - संवाद
छोटे अपराधों के लिए बनाया कम्युनिटी सर्विस कानून
उप जिला न्यायवादी अमन कौशिक ने बताया कि नए कानून में छोटे अपराध करने वालों के लिए कम्युनिटी सर्विस कानून बनाया गया है। इसमें दोषी को पौधे लगाने, पानी पिलाने, बच्चों को निशुल्क शिक्षा देने जैसी सजा मिलेगी। यह उन अपराधों के लिए है जिसमें तीन महीने से कम की सजा है और जुर्माने का प्रावधान है।
नए कानून में भीड़ में किसी व्यक्ति की जान जाने पर धारा 103 (2) के तहत फांसी की सजा का प्रावधान है। वहीं हिट एंड रन के मामले में भी अब 10 साल की सजा है। हिट एंड रन से बचने के लिए जिस व्यक्ति से दुर्घटना होती है, उसे घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाना होगा और पुलिस को भी सूचना देनी होगी। इतना ही नहीं अब पुलिस को अपराधी की तलाशी व बरामदगी करने के लिए उसकी वीडियोग्राफी करनी होगी। जिसे जांच अधिकारी कोर्ट में भी पेश करेगा।
ये बदली हुईं कुछ मुख्य धाराएं
अपराध आईपीसी बीएनएस
हत्या
302
103
हत्या का प्रयास
307
109
गैर इरादतन हत्या 304(ए) 106
दहेज हत्या 304(बी) 80
डकैती
395
310(3)
लूट
392
309(4)
दुष्कर्म
376
64
चोरी
380
305
धोखाधड़ी
420
318
उच्च अधिकारियों के निर्देश पर नए कानून के प्रति पुलिस व आमजनों को जागरूक किया जा रहा है। सेमिनार किए जा रहे हैं। सरकारी दफ्तरों में कार्यरत सरकारी वकीलों को भी नए कानून के बारे में बताया जा रहा है क्योंकि एक जुलाई से नया कानून लागू किया हो चुका है। यह कानून पहले से मजबूत है। उम्मीद है कि इस कानून में पीड़ित को समय रहते न्याय मिलेगा।
डॉ. पंकज सैनी, जिला न्यायवादी करनाल