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Karnal News: आईडीटीआर का सिस्टम फेल, डीएल टेस्ट देने वाले कैसे होंगे पास

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- एडीसी ने आईडीटीआर अधिकारी को लगाई फटकार, बोले- अपनी गलती की सजा दूसरों को क्यों दे रहे, दोबारा शिकायत मिली तो होगी कार्रवाई
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- सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में उठा मुद्दा, ड्राइविंग लाइसेंस टेस्ट में चार पहिया वाहन चालक 57 तो दो पहिया वाहन चालक 45 प्रतिशत हो रहे फेल

माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। बेहतर ड्राइविंग प्रशिक्षण और डीएल के लिए होने वाले अंतरराष्ट्रीय स्तर के टेस्ट की व्यवस्था वाले आईडीटीआर (इंस्टीट्यूट ऑफ ड्राइविंग ट्रेनिंग एंड रिसर्च) की व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। संस्थान का टेस्ट के दौरान रूट पर लगा सेंसर खराब है, ऐसे में संस्थान के अधिकारी टेस्ट देने वाले युवाओं को इस खामी के बावजूद फेल कर रहे हैं। इससे लोगों को कई बार टेस्ट देना पड़ रहा है।

जब यह मामला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में उठा तो एडीसी अखिल पिलानी से आईडीटीआर के अधिकारी को फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि गलती तुम्हारी है तो रि-टेस्ट के नाम पर लोगों को क्यों परेशान कर रहे हो। इसके बाद भी परेशानी तब बड़ी हो रही है, जब हर बार टेस्ट देने वाला प्रार्थी फेल हो रहा है। इस बात का अधिकारी संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। हालांकि उन्होंने यह कहा कि एसडीएम कार्यालय की टीम भी उनकी व्यवस्था की जांच कर चुकी है।
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इस पर एडीसी ने कहा कि अपना सिस्टम दुरुस्त करें, अन्यथा दोबारा शिकायत मिली तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। समाधान शिविर में भी आईडीटीआर की टेस्ट में बार-बार फेल करने व अन्य अव्यवस्थाओं की ज्यादा शिकायतें आ रही हैं। आईडीटीआर की रिपोर्ट के अनुसार, हर माह करीब 450 से 500 लोग दो पहिया और इतने ही चार पहिया वाहन के चालक ड्राइविंग लाइसेंस के लिए टेस्ट देते हैं। पिछले कुछ माह में चार पहिया वाहन चालक केवल 43 प्रतिशत और दो पहिया वाहन चालक केवल 55 प्रतिशत ही पास हो पाते हैं। बैठक में नए एवं पुराने मिलाकर 37 मामलों पर चर्चा हुई। इनमें से 20 का मौके पर समाधान हुआ।

स्कूलों में लगे ओवरलोड ई-रिक्शा और ऑटो के होंगे चालान
स्कूल बसों की तर्ज पर अब बच्चों से ओवरलोड चलने वाले ई-रिक्शा और ऑटो रिक्शा के भी चालान किए जाएंगे। इसे लेकर एडीसी ने डीएसपी को निर्देश दिए। जब गैर सरकारी सदस्यों ने इस मुद्दे को उठाया तो उन्होंने कहा कि जिला शिक्षा अधिकारी के माध्यम से सरकार को पत्र लिखा है ताकि इनके लिए भी पॉलिसी बनाई जाए। ओवरलोड होने की स्थिति में पुलिस कार्रवाई करेगी।
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स्कूल बसों की जांच हुई बंद
महेंद्रगढ़ में स्कूल बस हादसे के बाद केवल अप्रैल माह में ही सख्ती बरती गई थी। अब प्रशासनिक टीमें और अधिकारी हादसा भूलते हुए जांच बंद कर चुके हैं। बैठक में प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार, दो माह में एसडीएम घरौंडा, असंध, करनाल और इंद्री की ओर से एक भी स्कूल बस की जांच नहीं की गई। जबकि आरटीए करनाल की ओर से महज 45 बसों की जांच की गई। इस पर एडीसी ने हर माह जांच करके रिपोर्ट देने के निर्देश दिए।


बैठक में ये हुए निर्णय

- रंबा गांव में मां वैष्णो देवी मंदिर के पास तीव्र मोड़ पर साइन बोर्ड लगेगा।

- उचाना पीएनबी से धोलगढ़ रोड पर खुले सीवरेज पर ढक्कन लगेगा।

- मोहिदीनपुर से चूड़ीपुर रोड पर गड्ढे भरवाए जाएंगे।

- तरावड़ी बूथ (एनएच-44) के किनारे सूखे पेड़ व घरौंडा की अशोका कॉलोनी में बीच सड़क पर खड़े सफेदे के पेड़ हटवाए जाएंगे।

- ताऊ देवी लाल चौके से मेरठ रोड पर दुर्घटना संभावित क्षेत्र को दर्शाने वाले साइन बोर्ड लगेगा।

- बलड़ी बाईपास शराब ठेके के पास ट्रैफिक लाइट नई लगेगी और हरी बत्ती की समय सीमा बढ़ाई जाएगी। यहां टूटी सीवर लाइन भी दुरुस्त होगी।
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