माई सिटी रिपोर्टर
तरावड़ी। नीलोखेड़ी के सग्गा गांव में सोमवार रात बारिश में एक मकान गिर गया। जिसके नीचे मकान में सो रहा दंपती दब गया और मौत हो गई। वहीं, चार बच्चों की जान बच गई। दूसरी घटना तरावड़ी के वार्ड- 4 की रही। यहां भी मकान की छत गिर गई। जिसमें मकान मालिक के सिर पर चोट लगी और पत्नी व बच्चे बाल-बाल बचे।
सग्गा गांव में मकान की छत गिरने से मजदूरी करने वाले 48 वर्षीय सलिंद्र और उसकी पत्नी 45 वर्षीय सुनीता की मलबे में दबकर मौत हो गई। सुबह छह बजे सलिंद्र के पिता पालाराम उन्हें उठाने के लिए गए तो दरवाजे के बाहर छत का मलबा गिरा था। उन्होंने सीढ़ी से चढ़कर देखा तो कड़ियों के सहारे टिकी छत दंपती के ऊपर गिरी थी। ग्रामीणों की मदद से मलबे में दबे दंपती को बहार निकाला गया मगर उनकी मौत हो चुकी थी। पिता पाला राम ने बताया कि बेटा और बहू दिहाड़ी मजदूरी कर परिवार का पालन पोषण कर रहे थे। जिस कमरे में दोनों सो रहे थे, उसी कमरे में ही रसोई का सामान, कपड़े, फ्रिज, टेलीविजन भी रखा था। सब मलबे में दब गया। इस घटना से गांव में मातम का माहौल है।
चार बच्चों के सिर से उठा माता-पिता का साया
पाला राम ने बताया कि उसके बेटे के चार बच्चे हैं। बेटी काजल, अंजलि और बेटे रवि और अमित हैं। बड़ी बेटी की शादी हो चुकी है। पाला राम ने प्रशासन से आर्थिक मदद की गुहार लगाई है। तरावड़ी थाना के एसएचओ सज्जन सिंह ने बताया कि दंपती के शवों का पोस्टमार्टम करवा परिजनों को सौंप दिया है। सलिंद्र के भतीजे शुभम ने बताया कि चचेरे भाई बहन बैठक में सो रहे थे, जिसकी वजह से उनकी जान बच गई।
छत गिरने से दंपती घायल, बच्चे सलामत
दूसरी घटना तरावड़ी के वार्ड-4 की है, जहां रात को मकान की छत गिरने से मकान मालिक रविंद्र गंभीर रूप से घायल हो गए। पत्नी और बच्चे मामूली रूप से चोटिल हुए। मकान मालिक रविंद्र ने बताया कि रात 10 बजे खाना खाकर बच्चे सो गए थे। लगभग 11 बजे छत का गार्डर मलबे के साथ उनके ऊपर आ गिरा। आफनफानन परिवार के दूसरे लोगों का बुलाया और मलबा हटाकर पत्नी और बच्चों को मलबे से बाहर निकाला। उन्होंने नगरपालिका प्रशासन से मदद की मांग की है।
सेक्टर-13 में धंसी सड़क
करनाल। लगातार बारिश से शहर में जलभराव की समस्या हो गई है। सोमवार को सेक्टर-13 में सड़क का एक हिस्सा धंस गया है। कांग्रेस के जिला संयोजक त्रिलोचन सिंह और पार्षद वीर विक्रम ने सड़क का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि जलभराव की समस्या हल करने के नगर निगम के दावे खोखले साबित हुए हैं। जगह-जगह जलभराव हो गया है। अगर समय रहते ड्रेन और नालों की सफाई करवाई गई होती तो ये हालात पैदा न होते। ब्यूरो