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Karnal News: परमात्मा के गुणों में खुद के मन को रंगने का प्रतीक है होली

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संवाद न्यूज एजेंसी
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करनाल। सेक्टर- 7 के प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय सेवा केंद्र की ओर से आयोजित होली कार्यक्रम का आध्यात्मिक रहस्य बताते हुए राजयोगिनी प्रेम दीदी ने कहा कि होली रंगों का त्यौहार है। होली प्रभु के संग के रंग व परमात्मा के गुणों में खुद के मन को रंगने का प्रतीक है। स्थूल रंग अल्पकाल का होता है, परंतु परमात्मा रंग में आत्मा सदैव रंगी रहती है। यह रूहानी रंग होता है जो आत्मा को रंगता है। उन्होंने कहा कि होली दो प्रकार की होती है, एक जलाने की होली दूसरी मनाने की होली। जब योग की अग्नि में विकारों रूपी उपले व कंटीली लकड़ियां जलाई जाती हैं तो आत्मा पर लगे विकारों के दाग जल जाते हैं।
आत्मा सच्चे सोने की तरह चमक जाती है तो आत्मा खुशियों से भरपूर हो जाती है। फिर मनाई जाती है होली प्रभु संग के रंग में रंग जाने की। होली का अंग्रेजी में अर्थ होता है पवित्र, दूसरा होली यानि मैं आत्मा परमात्मा की हो ली। यानि मेरा सर्वस्व परमात्मा का और परमात्मा का सर्वस्व मेरा हो गया। तीसरा होली मैं जो हो गया सो हो गया पास्ट इज पास्ट। यानि बीती ताही विसार के आगे की सुध ले।
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ब्रह्माकुमारी शिखा बहन ने कहा कि होलिका ने प्रहलाद को अपनी गोद में बिठाया और आग में बैठ गई परंतु होलिका जल गई। प्रहलाद बच गया। मतलब जिसका नाता परमात्मा के साथ है उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। जिसका साथी है भगवान उसको क्या रोकेगा। उन्होंने कहा कि जब हम आत्माओं से पुराने स्वभाव, संस्कार व नेगेटिव वृत्तियों का रंग उतरता है तभी प्रभु रंग हम पर चढ़ता है। इस पिचकारी द्वारा हम आत्माओं पर ज्ञान, प्रेम, सुख, शांति, आनंद, पवित्रता व शक्ति रूपी रंग डालकर हम आत्माओं को इन अविनाशी रंगों से रंग देते हैं।
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मौके पर बीके शिविका ने होली पर्व पर एक बहुत सुंदर कविता प्रस्तुत की। कुमारी रीतिका, तविशी व काजल ने अपने सुंदर नृत्यों द्वारा सबको आनंदित किया। इस अवसर पर प्रशांत छोकर, नदीम, रमेश कुमार, डा. एनके महानी, जसमेर सिंह, ओम प्रकाश, धर्म सिंह भारती, रामनिवास गर्ग, सुरेश गोयल, सुनील वालिया, हरी कांबोज, ऋषिराज शर्मा, केके खन्ना, आरके राणा, राजेंद्र हांडा, डा. केके चावला, सुनीता मदान, विमल मेहता, छवि चौधरी, शशि मेहता, रितेश विज, शाम भाटिया, महिंद्र सचदेवा, राकेश छाबड़ा, मीनू छाबड़ा, नरेंद्र बजाज, हरिकृष्ण मलिक व हरिकृष्ण नारंग सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे। सभी को आत्म स्मृति का तिलक लगाया गया।
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